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सर्राफा

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों को 49,100 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 48,300 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 73,600 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 71,200 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों को 49,300 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 48,900 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 70,500 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 69,200 रुपये पर सहारा रह सकता है।

डॉलर के मजबूती से सर्राफा की कीमतों में गिरावट की संभावना - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

वैश्विक इक्विटी बाजारों में गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर में निवेश और फेडरल रिजर्व द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका में आर्थिक सुधार की गति को लेकर चिंता के कारण सर्राफा की कीमतों में गिरावट हुई है।

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों को 48,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 48,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 66,880 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 67,200 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों तो 49,280 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 48,900 रुपये रुपये पर सहारा रह सकती है चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 66,800 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 65,700 रुपये पर सहारा रह सकता है अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद आज सोने की कीमतें स्थिर रही जबकि निवेशकों को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में प्रोत्साहन पैकेज का इंतजार है।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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