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क्या हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर राहत भरे संकेतों से बाजार को मिली नई उम्मीद?

बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम ने वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और भारतीय शेयर बाजार की दिशा पर विस्तार से अपनी राय रखी।

उनके अनुसार, ट्रंप के बयानों पर अब बाजार पहले जितना भरोसा नहीं करता क्योंकि वे अक्सर अपने रुख में बदलाव करते रहते हैं। निवेशक अब केवल उनके ट्वीट्स या टिप्पणियों के बजाय जमीनी हालात और आधिकारिक बयानों को अधिक महत्व दे रहे हैं। सुनील सुब्रमण्यम ने कहा कि वर्तमान समय में तेल बाजार की चाल को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार को उम्मीद है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि समाधान अभी पूरी तरह निकट नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से बातचीत और समझौते की कोशिशें जारी हैं। इसी उम्मीद के चलते तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है।

उन्होंने विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधिकारिक स्तर पर यह संकेत मिला है कि वहां से तेल आपूर्ति को पूरी तरह बाधित नहीं किया जाएगा। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली है। हालांकि उत्पादन सुविधाओं को हुए नुकसान और बंद तेल कुओं को दोबारा शुरू करने में लगने वाले समय के कारण तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर से घटकर 85 डॉलर तक आ सकता है, लेकिन उससे बहुत नीचे जाने की संभावना फिलहाल कम है।

भारतीय बाजार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में नरमी भारत के लिए सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव कम होता है। इसके चलते निवेशकों की वह चिंता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। उनका मानना है कि आगामी आरबीआई नीति बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है और केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए अन्य कदम उठा सकता है।

बाजार में आई तेज़ तेजी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि एफएमसीजी क्षेत्र को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। खासकर बैंकिंग और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने इसे एक राहत रैली के रूप में लिया क्योंकि वैश्विक जोखिम कुछ कम होते दिखाई दिए।

उन्होंने आगे कहा कि जून के पहले पखवाड़े में दो प्रमुख कारकों पर निवेशकों की नजर रहेगी। पहला, आरबीआई की मौद्रिक नीति और दूसरा, मानसून की प्रगति। यदि मानसून सामान्य रहता है तो ग्रामीण मांग और खपत को मजबूती मिलेगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों को समर्थन मिल सकता है।

विदेशी निवेशकों (FII) की भूमिका पर चर्चा करते हुए सुनील सुब्रमण्यम ने कहा कि भले ही भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ी हो, लेकिन विदेशी निवेशक अब भी फ्री-फ्लोट हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करते हैं। इसलिए उनके निवेश व्यवहार पर नजर रखना जरूरी है। यदि विदेशी निवेशक भी इस सकारात्मक माहौल में खरीदारी की ओर लौटते हैं, तो बाजार में आने वाले दिनों में और मजबूती देखने को मिल सकती है।

उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि शेयर बाजार मूल रूप से विश्वास पर चलता है। जब निवेशकों का भरोसा बढ़ता है तो बाजार तेजी दिखाता है। फिलहाल वैश्विक तनाव में नरमी, तेल की कीमतों में गिरावट, आरबीआई से सकारात्मक उम्मीदें और विदेशी निवेशकों के रुख में संभावित सुधार जैसे कारक भारतीय बाजार के लिए अनुकूल दिखाई दे रहे हैं। आने वाले कुछ सप्ताह बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

(शेयर मंथन, 01 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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