बेस मेटल की कीमतों में नरमी का रुझान रह सकता हैं। कोविड-19 के एक नये संस्करण ओमिक्रॉन और अमेरिकी फेड दरों में अनुमान से पहले बढ़ोतरी की संभावना से आर्थिक मंदी की चिंताओं के कारण कीमतों पर दबाव रह सकता है।
बेस मेटल में निचले स्तर पर खरीदारी हो सकती है।
बेस मेटल की कीमतों में निचले स्तर पर शॉर्ट कवरिंग (जवाबी खरीद) होने की संभावना है।
बेस मेटल में निचले स्तर पर शॉर्ट कवरिंग (जवाबी खरीद) हो सकती है।
बेस मेटल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना हैं। तांबे की कीमतों को 763 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 755 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
बेस मेटल की कीमतें मिले-जुले रुझान के साथ कारोबार कर सकती है। तांबे की कीमतें 738-745 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
बेस मेटल की कीमतें मिले-जुले रुझान के साथ कारोबार कर सकती है। तांबे की कीमतें 730-738 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
बेस मेटल की कीमतें अधिक उठापटक के साथ कारोबार कर सकती है।
बेस मेटल की कीमतों में निचले स्तर से उछाल दर्ज की जा सकती है।
बेस मेटल की कीमतों में नरमी बरकरार रह सकती है।
बेस मेटल की कीमतों पर बिकवाली का दबाव रहने की संभावना हैं। तांबे की कीमतें 546 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 540 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।
चीन के बेहतर आर्थिक आँकड़ों के कारण बेस मेटल की कीमतों के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है।
बेस मेटल की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ एक दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
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मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।