कच्चे तेल की कीमतों के एक दायरे में रहने की संभावना है। कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतें 3,740-3,860 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों के एक दायरे में रहने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों के नरमी के साथ खुलने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 2,970 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 2,730 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 3,040 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,830 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किये जाने की संभावना हैं और कीमतों को 2,980 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,780 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 3,020 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,860 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 3,060 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,890 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रहने की संभावना है क्योंकि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण, नये सिरे से लॉकडाउन से आर्थिक सुधार को धीमा होने की आशंका और अमेरिकी स्टीमुलस वार्ता के बाधित होने से ईंधन की माँग में बढ़ोतरी पर रोक लग सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें 2,920-3,060 रुपये के कम दायरे में फंसी हुई हैं, लेकिन हमने पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में रिकवरी देखी है।
मिले-जुले फंडामेंटल के कारण कच्चे तेल की कीमतों के सीमित दायरे में रहने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों के गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतें 3,670-3,750 रुपये के दायरे मे कारोबार कर सकती हैं।
कच्चे तेल में निचले स्तर पर खरीदारी हो सकती है और एमसीएक्स में कीमतें 4,000 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।
एमसीएक्स में कच्चे तेल की कीमतें 3,950 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ 4,000 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।
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मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।