कच्चे तेल की कीमतों के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रह सकती है। कीमतों के 5,410-5,560 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
कम आपूर्ति और रूस एवं यूक्रेन के बीच बढ़ते सामरिक तनाव के कारण पहले से ही कम आपूर्ति वाले बाजार में अधिक व्यवधन को लेकर चिंताओं से तेल की कीमतें सात वर्षो में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गयी है।
वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी के बाद ईंधन की माँग को लेकर चिंता के बीच अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में लगातार पाँचवें हफ्ते गिरावट के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें 2,850-3,020 रुपये के कम दायरे में फंसी हुई हैं, लेकिन पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में रिकवरी देखी गयी है।
कच्चे तेल की कीमतों पर बिकवाली का दबाव रहने की संभावना हैं और कीमतों को 4,460 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 4,380 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़त के साथ खुल सकती है और 4,000-4,080 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में बढ़त के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों में मिल-जुला कारोबार होने की संभावना है। कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतें 3,680-3,750 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।