सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 3,620-3,740 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से नरमी के रुझान पर सोयाबीन वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 5,100-5,000 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों के 3,725-3,795 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 3,725-3,790 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 3,700-3,795 रुपये के सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 3,320-3,400 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (जून) की कीमतों में नरमी दिख रही है, इसमें बिकवाली के साथ 6,600-6,400 रुपये का निचला स्तर देखने को मिल सकता है।
सोयाबीन वायदा (सितंबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 3,650-3,695 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
खाद्य विभाग राजस्थान द्वारा तिलहन और खाद्य तेलों पर स्टॉक सीमा लगाये जाने की खबरों के कारण सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों में कल 6% के लोअर सर्किट पर गिरावट हुई है।
सोयाबीन वायदा (जनवरी) की कीमतों के 3,330 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 3,390 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (जनवरी) की कीमतों के 3,330 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ 3,390 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
उत्पादन अनुमान से कम रहने के डर से नयी खरीदारी से सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में कल 2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गयी।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 3,850 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ 3,950 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।