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आईटी सेक्टर से निकलकर इन सेक्टर्स में मिल सकता है बेहतर मौका : विकास सेठी

भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ डील हो चुकी है और 18% की दर पर समझौता सामने आया है, जो अन्य देशों के मुकाबले बेहतर माना जा रहा है, तब भी बाजार ठंडा क्यों नजर आ रहा है।

बाजार विशेषज्ञ विकास सेठी का मानना है कि बाजार ने इस खबर पर शुरुआती खुशी जरूर दिखाई, लेकिन अभी डील की पूरी शर्तें (फाइन प्रिंट्स) सामने आना बाकी हैं। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और नीतियों में बार-बार बदलाव की वजह से निवेशक तब तक पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे, जब तक यह डील आधिकारिक रूप से साइन, सील और लागू नहीं हो जाती। 

जब भारत-अमेरिका ट्रेड डील की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी और जॉइंट स्टेटमेंट के साथ उसे लागू कर दिया जाएगा, तब बाजार में दोबारा अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार इंतजार के मूड में है। वहीं, निफ्टी के 26,000 के आसपास एक मजबूत रेजिस्टेंस बनता दिख रहा है। हालांकि व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) में उतनी कमजोरी नहीं है, जितनी इंडेक्स में नजर आ रही है। इसका बड़ा कारण आईटी सेक्टर में आई गिरावट है, क्योंकि निफ्टी और सेंसेक्स में आईटी शेयरों का वजन ज्यादा है।

आईटी सेक्टर पर हाल के दिनों में दबाव बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर एआई टूल्स और नई टेक कंपनियों की वजह से सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं। इससे इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

शॉर्ट टर्म में इन शेयरों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में आईटी सेक्टर को दूसरे सेक्टर्स की तुलना में बाजार से बेहतर रिटर्न देना मुश्किल हो सकता है। इसलिए निवेशकों को धीरे-धीरे आईटी सेक्टर से निकलकर दूसरे सेक्टर्स में अवसर तलाशने की सलाह दी जा रही है। 

बजट के बाद जिन सेक्टर्स को लेकर ज्यादा सकारात्मक नजर आ रहे हैं, उनमें डेटा सेंटर, पावर, ईएमएस (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज), सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रमुख हैं। सरकार की नीतियों और टैक्स छूट की वजह से डेटा सेंटर सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है, जिससे पावर और कूलिंग सिस्टम से जुड़ी कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, भारत के अमेरिका, यूरोप और यूके के साथ ट्रेड डील होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चीन के विकल्प के तौर पर मजबूती मिल सकती है। ईएमएस सेक्टर में डिक्सन, केईएस टेक्नोलॉजी, पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट, एलॉन टेक्नोलॉजी और सिरमा एसजीएस जैसी कंपनियों में लॉन्ग टर्म के लिए अवसर बताए गए हैं।

आईटीसी के शेयर में हाल ही में तेज उछाल देखने को मिला है। सिगरेट पर टैक्स और कीमत बढ़ने की आशंकाओं के चलते यह शेयर पहले काफी टूट चुका था। अब कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने से निवेशकों को भरोसा मिला है कि मार्जिन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मौजूदा स्तरों पर आईटीसी ऐतिहासिक रूप से कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है और करीब 4% का डिविडेंड यील्ड भी देता है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए इसमें धीरे-धीरे खरीदारी करने का मौका माना जा रहा है।

आरबीआई की ताजा मौद्रिक नीति में रेपो रेट में कटौती नहीं की गई, जिससे यह संकेत मिला कि फिलहाल रेट कट साइकल पर ब्रेक लग सकता है। हालांकि पहले किए गए रेट कट और सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी की वजह से बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले एक-दो साल में बैंकिंग सेक्टर भारत की आर्थिक ग्रोथ के साथ अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। पीएसयू बैंकों में एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा को मजबूत विकल्प बताया गया है, जबकि प्राइवेट सेक्टर में कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक पर नजर रखने की सलाह दी गई है। ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक आरबीएल बैंक जैसे मिडकैप बैंकों पर भी नजर रख सकते हैं।

पीएफसी और आरईसी के संभावित मर्जर की खबरों के बीच दोनों शेयरों को लेकर विशेषज्ञ सकारात्मक हैं। मर्जर का फाइनल रेशियो आने के बाद तस्वीर और साफ होगी, लेकिन वैल्यूएशन और डिविडेंड यील्ड के लिहाज से दोनों कंपनियां आकर्षक बताई जा रही हैं। वहीं, ओसवाल पंप्स जैसे स्टॉक्स में आई भारी गिरावट के बाद वैल्यूएशन आकर्षक हो गया है और लॉन्ग टर्म निवेश के लिए इसे अच्छा मौका माना जा रहा है। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज को लेकर भी विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल और बड़े समूह का सपोर्ट इसे लंबे समय में मजबूत बना सकता है।


(शेयर मंथन, 07 फरवरी 2026)

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