शेयर बाजार में इन दिनों निराशा का माहौल है। कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में सफल नहीं हो रही है।
हालांकि, ऐसे समय को कई अनुभवी निवेशक अवसर के रूप में देखते हैं। बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम भारतीय बाजार में अभी उतना बड़ा करेक्शन नहीं आया है, जितना आमतौर पर मजबूत खरीदारी के मौके पैदा करता है। इसकी बड़ी वजह घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी है। मार्च में विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और रिटेल निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, वैल्यूएशन के लिहाज से आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत सस्ता दिखाई देता है, लेकिन वहां भी ग्रोथ की रफ्तार कमजोर है। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी ऊंचे वैल्यूएशन पर भविष्य की तेज ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में निवेशकों को केवल कम पीई रेशियो देखकर निवेश नहीं करना चाहिए, बल्कि सेक्टर और कंपनी की कमाई की संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
(शेयर मंथन, 05 अगस्त 2026)
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