कृष सुब्रमण्यम
स्टॉकमसाला.कॉम
भारतीय बाजार में घरेलू निवेशक लगातार इसकी रीढ़ बने हुए हैं। ब्याज दरें अभी भी अनुकूल स्तर पर हैं और महँगाई मध्यम स्तर पर बनी हुई है। मुझे दूसरी कतार के कई शेयर आकर्षक नजर आ रहे हैं और आने वाले समय में कई नये दिग्गज (ब्लूचिप) शेयर भी उभर सकते हैं।
इस समय कच्चे तेल की कीमतों में सुधार, गिरावट के कारण बाजार का निचले स्तरों पर होना और घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे सकारात्मक कारक हैं। मुझे उम्मीद है कि एफआईआई भी बाजार में लौट सकते हैं। दूसरी ओर, भूराजनीतिक परिस्थितियाँ बाजार के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक कारक हैं। वैश्विक भूराजनीतिक स्थिति गंभीर बनी हुई है और भारत को अपने शत्रुतापूर्ण पड़ोस के कारण सतर्क रहना होगा।
अगले 12 महीनों में मैं भारतीय बाजार को वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हुए देखता हूँ। दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स का मेरा लक्ष्य 88,000 और निफ्टी का लक्ष्य 25,900 के स्तर पर है। अगले 12 महीनों के लिए मेरा सेंसेक्स लक्ष्य 90,000 और निफ्टी का लक्ष्य 27,200 है। मगर मुझे निकट भविष्य में सेंसेक्स के 1 लाख के स्तर पर पहुँचने की संभावना नहीं दिखती।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निफ्टी की ईपीएस 1,250 रुपये और इसके अगले वित्त वर्ष के लिए 1,400 रुपये रहने का अनुमान है। मुझे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉरपोरेट आय में 10-20% की वृद्धि होगी। वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6% और 2027-28 में 6.9% रह सकती है।
मेरे अनुसार एनबीएफसी, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज, आईटी, केमिकल और फार्मा बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र हो सकते हैं, जबकि ऑटो और सीमेंट कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। अगले 12 महीनों के लिए मेरी प्रमुख पसंद इंडस टावर्स, पावर ग्रिड, आरबीएल बैंक, एबी कैपिटल और एंजेल ब्रोकिंग हैं।
अगले 6 महीनों में अमेरिका-ईरान युद्ध एवं भूराजनीतिक घटनाक्रम तथा तिमाही नतीजे भारतीय बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय बाजार पर हल्का नकारात्मक असर पड़ा है। उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अगले 3 महीनों में हो जायेगा। मगर अगले 3-6 महीनों में यह समझौता होने पर इसका भारतीय बाजार पर ज्यादा असर होने की संभावना नहीं लग रही है।
अगले 12 महीनों में वैश्विक बाजारों में एआई से जुड़ी कंपनियों में गिरावट (करेक्शन) देखने को मिल सकती है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों को कुछ एआई कंपनियों को एकीकृत करने या उनका अधिग्रहण करने का अवसर मिल सकता है, जिससे आईटी शेयरों को फिर से पटरी पर आने में मदद मिलेगी।
मुझे उम्मीद है कि एफपीआई जल्द ही भारतीय बाजार में लौट सकते हैं, क्योंकि मूल्यांकन (वैल्यूएशन) अब आकर्षक हो गये हैं। साथ ही, रुपये में भी काफी कमजोरी आ चुकी है और यदि इसमें फिर मजबूती आती है, तो एफआईआई को दोहरा लाभ मिल सकता है। अगले छह महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 91-95 के दायरे में रह सकती है।
(शेयर मंथन, 19 जुलाई 2026)