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घरेलू माँग और निवेश से मजबूत बनी भारतीय बाजार की संरचनात्मक कहानी

जितेंद्र पांडा

पार्टनर, नाइन एल्प्स कॉर्पोरेट एडवाइजर्स 

मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 90,000 और निफ्टी को 27,500 के स्तर पर देखता हूँ। अगले 12 महीनों के लिए मेरा सेंसेक्स लक्ष्य 96,000 और निफ्टी का लक्ष्य 30,000 है। मैं सेंसेक्स को वर्ष 2027 तक 1 लाख के स्तर पर पहुँचते का अनुमान लगा रहा हूँ।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 0-10% की वृद्धि होने की संभावना बन रही है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 6.3% और 2027-28 में 6.6% रह सकती है। निफ्टी की ईपीएस 2026-27 में 1,170 रुपये और 2027-28 में 1,270 रुपये रहने का मेरा अनुमान है।

इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए घरेलू खपत एक प्रमुख सकारात्मक कारक है, जिसे म्यूचुअल फंड सिप निवेशकों का मजबूत समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, सरकार की ओर से निवेश को दिया जा रहा समर्थन तथा महँगाई का नियंत्रण में रहना भी बाजार के लिए सकारात्मक है। दूसरी ओर, अमेरिका की व्यापार नीति में अस्थिरता और भूराजनीतिक संबंधों से जुड़ी अनिश्चितताएँ, एफपीआई निवेश प्रवाह में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और बाजार में पहले ही आ चुकी चाल प्रमुख नकारात्मक कारक हैं।

अगले 12 महीनों में मैं भारतीय बाजार के प्रदर्शन को वैश्विक बाजारों के अनुरूप देखता हूँ। मेरे अनुसार रक्षा (डिफेंस), वित्तीय सेवाएँ (फाइनेंशियल सर्विसेज), बिजली (पावर) और अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र हो सकते हैं, जबकि धातु (मेटल) और स्पेशियलिटी केमिकल कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। अगले 12 महीनों के लिए मेरी प्रमुख पसंद आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल और एलऐंडटी हैं।

अगले 6 महीनों में अमेरिकी टैरिफ, भारत की जीडीपी वृद्धि दर, तिमाही नतीजे, महँगाई और ब्याज दरें भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय बाजार पर हल्का नकारात्मक असर पड़ा है। मुझे उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दिसंबर 2026 तक हो जायेगा। यदि अगले 3-6 महीनों में यह समझौता होता है, तो इसका भारतीय बाजार पर काफी सकारात्मक असर पड़ेगा।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महँगाई कम हो सकती है और ब्याज दरों में धीरे-धीरे कटौती की संभावना बन सकती है। इससे निवेशकों की इक्विटी के प्रति जोखिम लेने की क्षमता बढ़ेगी। वैश्विक एआई के संबंध में मेरा मानना है कि एआई का उत्पादकता और प्रदर्शन पर सकारात्मक असर है। भारतीय बाजार एआई सेवाओं के बैकएंड के रूप में अपनी भूमिका के लिए तैयार हो रहे हैं।

अगले 6 महीनों में भूराजनीतिक तनाव और एफपीआई के शुद्ध प्रवाह या निकासी का भारतीय बाजार पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है। हालाँकि, लगता है कि एफपीआई की अधिकांश बिकवाली या बाजार से निकासी पूरी हो चुकी है और 2026-27 की दूसरी छमाही में एफपीआई के शुद्ध खरीदार बनने की संभावना है। अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 95-99 के दायरे में रहने की संभावना है। 

भारत मजबूत मैक्रो आर्थिक बुनियाद, घरेलू तरलता (लिक्विडिटी) और निरंतर आय वृद्धि के दम पर दुनिया के सबसे मजबूत संरचनात्मक विकास वाले बाजारों में बना हुआ है। निकट अवधि में बाजार में आने वाली किसी गिरावट को मैं खरीदारी के अवसर के रूप में देखूँगा। अगले 12 महीनों में भारतीय इक्विटी के वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है और इस तेजी की अगुआई वित्तीय, रक्षा, बिजली और बुनियादी ढाँचा जैसे क्षेत्र कर सकते हैं।

(शेयर मंथन, 19 जुलाई 2026)

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