नरेंद्र वाधवा
एमडी, एसकेआई कैपिटल सर्विसेज
भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी सकारात्मक बात घरेलू माँग है। इसके साथ ही, विकास के नये क्षेत्रों का उभरना भी बाजार के लिए सकारात्मक है।
सबसे बड़े राज्यों में चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार बुनियादी ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर खर्च बढ़ाती हुई दिखाई दे सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था और बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, भूराजनीतिक परिस्थितियाँ और ऊर्जा की कीमतें बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताएँ हैं। अगले 12 महीनों में मेरा मानना है कि भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
मैं भारतीय शेयर बाजार के परिदृश्य (आउटलुक) को लेकर उत्साहित हूँ। अगले 6 महीनों में यानी दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स 83,000 और निफ्टी 28,000–29,000 के स्तर पर पहुँचने की उम्मीद है। अगले 12 महीनों में जून 2027 तक सेंसेक्स के लिए मेरा लक्ष्य 88,000 और निफ्टी के लिए 30,000 है।
निफ्टी की ईपीएस 2026-27 के लिए 1,425 रुपये और 2027-28 के लिए 1,580 रुपये रह सकती है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 10–20% की वृद्धि हो सकती है। वहीं, भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026-27 में 7% और अगले वित्त वर्ष में 8% रह सकती है।
मेरी नजर में अगले 12 महीनों में रक्षा (डिफेंस), बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाएँ (हेल्थकेयर), बुनियादी ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर), सेवा-सत्कार (हॉस्पिटैलिटी) और डेटा सेंटर इकोसिस्टम से जुड़े क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। वहीं, सॉफ्टवेयर और टेलीकॉम क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। मेरी पसंद के शेयरों में रिलायंस, एफडीसी, लॉयड इंजीनियरिंग, प्राज इंडस्ट्रीज और शक्ति पंप शामिल हैं।
अगले छह महीनों में भारतीय बाजार के लिए अमेरिका-ईरान युद्ध और भूराजनीति, कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा तिमाही नतीजे सबसे महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत और भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ा है। मुझे नहीं लगता कि हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष समाप्त हो गया है, हालाँकि अमेरिका और ईरान के बीच अंत में समझौता होने की उम्मीद है। मुझे उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दिसंबर 2026 तक हो सकता है और यदि अगले 3–6 महीनों में यह समझौता होता है, तो भारतीय बाजार पर इसका बहुत सकारात्मक असर पड़ेगा।
अगर महँगाई के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका बाजार पर नकारात्मक असर पड़ेगा। मेरा मानना है कि वैश्विक एआई बबल फूटना शुरू हो गया है। अगले छह महीनों में भूराजनीतिक घटनाक्रम भारतीय बाजार को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक कारक रहेगा।
एफपीआई बहुत जल्द भारतीय बाजार में नये निवेश के साथ लौट सकते हैं। अगले छह महीनों में डॉलर की कीमत 91–95 रुपये के दायरे में रह सकती है। सेंसेक्स के 1 लाख के स्तर तक पहुँचने की उम्मीद मुझे वर्ष 2030 तक है।
(शेयर मंथन, 19 जुलाई 2026)