प्रभात मित्तल
रिसर्च एनालिस्ट
भारतीय बाजार में निवेशकों को न तो जरूरत से ज्यादा आशावादी होना चाहिए और न ही अत्यधिक निराशावादी। मौजूदा परिस्थितियों में बेहतर रणनीति यह होगी कि अल्पावधि के कारोबार पर ध्यान दिया जाये और अच्छा प्रदर्शन कर रहे क्षेत्रों तथा शेयरों में ही अवसर तलाशे जायें। ऐसे कारोबार में सख्त स्टॉप-लॉस का पालन करना भी जरूरी है।
मुझे अगले छह महीनों में सेंसेक्स के 86,000 और निफ्टी के 26,300 के स्तर तक पहुँचने की उम्मीद है। अगले 12 महीनों के लिए मेरा सेंसेक्स का लक्ष्य 87,000 और निफ्टी का लक्ष्य 26,600 है। आने वाले समय में भारतीय बाजार का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के लगभग अनुरूप रह सकता है। एक लाख का स्तर हासिल करने में सेंसेक्स वर्ष 2030 तक का समय ले सकता है।
यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी उभरे और रुपये में मजबूती लौटे तो यह बाजार के लिए इस समय सबसे सकारात्मक संकेत होगा। दूसरी ओर, महँगाई और विदेशी निवेशकों के लिए करों में राहत नहीं मिलना बाजार के लिए प्रमुख चिंता के विषय हैं।
अगले 6 महीनों में अमेरिकी टैरिफ, महँगाई और ब्याज दरों की दिशा भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर पर भी बाजार की नजर रहेगी। मेरा अनुमान है कि अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 91-95 के दायरे में रह सकता है। एफआईआई अगले 3 महीनों में भारतीय बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है और रुपये में मजबूती बनी रहती है, तो बाजार की धारणा को सहारा मिल सकता है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारतीय बाजार पर अब तक बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है। मुझे उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अगले 3 महीनों में हो सकता है। यदि अगले 3-6 महीनों में ऐसा समझौता होता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अगले 12 महीनों में मुझे धातु (मेटल), बाजार एवं ब्रोकिंग, मिडकैप आईटी और रक्षा क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इसके विपरीत, दवा (फार्मा) और एफएमसीजी क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। मेरी पसंद के प्रमुख शेयरों में सेल, हिंडाल्को, नाल्को, एंजेल वन और कोफोर्ज शामिल हैं।
(शेयर मंथन, 20 जुलाई 2026)