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कम मूल्यांकन और सुधरती आय वृद्धि से बाजार का परिदृश्य सकारात्मक

प्रदीप गुप्ता

वाइस चेयरमैन, आनंद राठी फाइनेंशियल

सेंसेक्स अगले 6 महीनों में करीब 84,250 और निफ्टी करीब 26,500 के स्तर तक पहुँच सकते हैं। अगले 12 महीनों के लिए सेंसेक्स का मेरा लक्ष्य 92,000 और निफ्टी का लक्ष्य 28,800 है।

इस दौरान भारतीय बाजार का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर रह सकता है। मध्यम से लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजार को लेकर का नजरिया तेजी का है। मेरा मानना है कि सेंसेक्स वर्ष 2028 तक 1 लाख का स्तर हासिल कर सकता है। 

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय (अर्निंग) में 10-20% की वृद्धि हो सकती है। बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू आय वृद्धि (अर्निंग ग्रोथ) में सुधार की उम्मीद ही है। मेरा अनुमान है कि 2026-27 में निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 1,234 रुपये और 2027-28 में 1,405 रुपये रह सकती है। इसके अलावा, पिछले 5-10 वर्षों के मुकाबले मौजूदा मूल्यांकन (वैल्यूएशन) अपेक्षाकृत कम हैं। दूसरे देशों के बाजारों की तुलना में भी भारतीय बाजार का तुलनात्मक मूल्यांकन अभी आकर्षक नजर आ रहा है। 

हालाँकि, बाजार के सामने कुछ महत्वपूर्ण जोखिम भी हैं। भूराजनीतिक परिस्थितियाँ, रुपये में कमजोरी, मानसून की कमी और कर नीतियों से जुड़ा माहौल बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है। अगले 6 महीनों में कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, कंपनियों के तिमाही नतीजे तथा महँगाई और ब्याज दरों की दिशा सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता, भारत की कंपनियों की कमाई का अन्य बाजारों की तुलना में प्रदर्शन और सापेक्ष मूल्यांकन भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभायेंगे। मुझे उम्मीद है कि एफपीआई अगले 6 महीनों के भीतर भारतीय बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बन सकते हैं।

अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारतीय बाजार पर प्रभाव अब तक काफी नकारात्मक रहा है। यह कहना अभी मुश्किल है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो पायेगा। इसी तरह, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी मैं अभी निश्चित नहीं हूँ, लेकिन संभावना है कि यह समझौता दिसंबर 2026 तक हो जाये। इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 

क्षेत्रों की बात करें तो अगले 12 महीनों में वित्तीय सेवाओं, आईटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग और बैटरी से जुड़े क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इसके विपरीत, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटोमोबाइल में खास कर ट्रैक्टर एवं दोपहिया वाहन श्रेणियाँ अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं।

यदि वैश्विक एआई बुलबुला फूटता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मेरा मानना है कि ऐसी स्थिति में वैश्विक पूँजी के लिए भारत अपेक्षाकृत आकर्षक विकल्प बन सकता है। अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 91-95 के दायरे में रहने की संभावना है। 

(शेयर मंथन, 20 जुलाई 2026)

 

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