राजेश तांबे
सीईओ, अक्सान कैपिटल एडवाइजरी
बाजार के लिए इस समय सकारात्मक पहलू एसएमई आईपीओ के जरिये बाजार के एक नये खंड का उभरना है। वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़े प्रभाव बाजार के लिए नकारात्मक कारक हो सकते हैं।
अगले 6 महीनों में अमेरिका-ईरान युद्ध और भूराजनीतिक परिस्थितियों के साथ-साथ कच्चे तेल एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक रहेगा। इस संघर्ष का भारतीय बाजार पर अब तक हल्का नकारात्मक प्रभाव रहा है। यह अभी समाप्त नहीं हुआ है, हालाँकि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता होने की उम्मीद है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद है। संभव है कि यह दिसंबर 2026 तक अंतिम रूप ले ले। हालाँकि यदि अगले 3-6 महीनों में यह समझौता होता है, तो इसका भारतीय बाजार पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। वैश्विक और घरेलू ब्याज दरें मौजूदा स्तरों पर ही बने रहने की उम्मीद है। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया अगले 6 महीनों में 100 रुपये के स्तर तक पहुँच सकता है।
अगले 6 महीनों में सेंसेक्स और निफ्टी मौजूदा स्तरों के आस-पास ही रह सकते हैं। वहीं जून 2027 तक के लिए सेंसेक्स का मेरा लक्ष्य 84,000 और निफ्टी का लक्ष्य 26,500 है। मेरा अनुमान है कि सेंसेक्स वर्ष 2030 तक 1 लाख का स्तर हासिल कर सकता है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय (अर्निंग) में 10-20% की वृद्धि की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ने की दर 13.5% और 2027-28 में 15% रह सकती है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026-27 में 6% और 2027-28 में 6.2% रहने का अनुमान है। अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के अनुरूप रह सकता है। मुझे उम्मीद है कि एफपीआई अगले वर्ष भारतीय बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बन सकते हैं।
क्षेत्रों की बात करें तो अगले 12 महीनों में मेरा ध्यान नवीकरणीय ऊर्जा (रीन्यूएबल एनर्जी), खास कर सौर ऊर्जा क्षेत्र पर रहेगा। साथ ही दवा (फार्मा), एफएमसीजी, डेटा सेंटर से जुड़े बिजली संबंधी शेयर और जल से जुड़े शेयर मुझे पसंद हैं। इसके विपरीत, आईटी क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन कर सकता है। मुझे फिलहाल वैश्विक एआई बुलबुला फूटने के कोई खास संकेत नहीं दिख रहे हैं।
कुल मिलाकर, मेरा मानना है कि अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में भारत और चीन के शेयर बाजार ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल रह सकते हैं।
(शेयर मंथन, 21 जुलाई 2026)