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घरेलू मजबूती के सहारे बाजार में दृढ़ता, वैश्विक जोखिमों पर नजर

रवि सिंह

चीफ रिसर्च ऑफिसर, मास्टर कैपिटल सर्विसेज

भारतीय शेयर बाजार मध्यम अवधि में मजबूत बना रह सकता है। घरेलू आर्थिक वृद्धि, महँगाई में नरमी और लगातार मिल रहे नीतिगत समर्थन से बाजार को सहारा मिल सकता है, हालाँकि वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं को देखते हुए चुनौतियाँ भी बनी रहेंगी।

दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स के 84,000 और निफ्टी के 26,200 के स्तर तक पहुँचने की उम्मीद है। अगले 12 महीनों के लिए सेंसेक्स का मेरा लक्ष्य 90,000 और निफ्टी का लक्ष्य 27,000 है। मेरा मानना है कि सेंसेक्स वर्ष 2027 में ही 1 लाख का स्तर हासिल कर सकता है।

वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान है, जो अगले वित्त वर्ष में घट कर 6.4% रह सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 10-20% की वृद्धि की उम्मीद है। अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के अनुरूप रह सकता है।

अगले 6 महीनों में भारतीय बाजार के लिए अमेरिका-ईरान युद्ध और भूराजनीतिक परिस्थितियाँ, कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, अमेरिका की टैरिफ नीतियाँ, भारत की आर्थिक वृद्धि, कंपनियों के तिमाही नतीजे तथा महँगाई और ब्याज दरों की दिशा महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। वैश्विक स्तर पर अगले 6 महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की दिशा, भूराजनीतिक संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर की चाल भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 91-95 के दायरे में रह सकता है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारतीय बाजार पर अब तक हल्का नकारात्मक प्रभाव रहा है। यह कहना अभी मुश्किल है कि यह संघर्ष समाप्त हो गया है या अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो पायेगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जल्द होने की उम्मीद है और इसके वर्ष 2027 में किसी समय अंतिम रूप लेने की संभावना है। यदि अगले 3-6 महीनों में यह समझौता होता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

(शेयर मंथन, 21 जुलाई 2026)



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