शेयर मंथन में खोजें

News

ग्रे माकेर्ट से निपटने के लिए सेबी ला सकती है ये नया नियम, जानें इसके बारे में

प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) बाजार में पेश होने के बाद शेयर बाजार में सूचीबद्ध होता है, जिसके बाद उसमें खरीद-बिक्री की जाती है। मगर अब बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) बिना आईपीओ के लिस्ट हुए उसमें ट्रेडिंग शुरू करने पर विचार कर रहा है। ये जानकारी खुद सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच ने दी है।

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर बढ़ायीं ब्याज दरें, जानें डिटेल

नये साल में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) की दरों में बदलाव करने की घोषणा की है। संशोधित ब्याज दरें 20 जनवरी से लागू हो गयी हैं। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह बदलाव 3 करोड़ रुपये तक की एफडी के लिए किया गया है।

रेल से जुड़े बुनियादी उद्योगों की जरूरतें पूरी करने से तेज होगी देश की आर्थिक रफ्तार : विवेक लोहिया, ज्यूपिटर वैगन्स

आम बजट 2025-26 को लेकर आम नागरिक समेत देश के हर छोटे-बड़े उद्योग की अपनी-अपनी जरूरतें और अपेक्षायें हैं। इसी कड़ी में ज्यूपिटर वैगन्स के प्रबंध निदेशक विवेक लोहिया ने रेलवे बुनियादी ढाँचा उद्योग के लिए केंद्रीय बजट से अपेक्षायें प्रकट कीं। ज्यूपिटर वैगन्स भारत में रेल डिब्बा, उसके घटकों और कास्टिंग के सबसे बड़े और प्रमुख निर्माताओं में से एक है।

Mutual Fund Investment: बदल सकता है ओवरनाइट फंड की एनएवी का कट ऑफ समय, सेबी ने दिया प्रस्ताव

बहुत ही जल्द कुछ खास तरह के म्यूचुअल फंड की एनएवी की गणना अलग तरीके से होगी। दरअसल, बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ चुनिंदा योजनाओं की एनएवी के कट ऑफ टाइम को बदलने का प्रस्ताव पेश किया है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख