जेके टायर के शेयर में करीब 388 रुपये के भाव पर निवेश करने वाले निवेशक के लिए बड़ा सवाल यह है कि अगर वह करीब एक साल तक शेयर को होल्ड कर सकता है तो आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि फिलहाल टायर कंपनियों पर इनपुट मटेरियल की बढ़ी हुई लागत का दबाव बना हुआ है। कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनी के मार्जिन और मुनाफे पर असर पड़ सकता है, इसलिए आने वाले समय में जेके टायर समेत टायर कंपनियों के लिए कुछ दबाव बना रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से ऑटो सेक्टर और ऑटो कंजम्पशन के साथ टायर इंडस्ट्री का सीधा संबंध है। कोई भी वाहन टायर के बिना नहीं चल सकता, इसलिए अगर ऑटो सेक्टर में मांग और ग्रोथ का माहौल सुधरता है तो इसका फायदा टायर कंपनियों को भी मिल सकता है।
वैल्यूएशन की बात करें तो एक्सपर्ट के मुताबिक जेके टायर करीब 15 गुना के वैल्यूएशन पर है, जो उन्हें मौजूदा स्थिति में बहुत ज्यादा महंगा नहीं लगता। उनका मानना है कि शेयर में जितना करेक्शन होना था, उसका बड़ा हिस्सा कीमत में पहले ही आ चुका है। जून में शेयर करीब 350 रुपये के आसपास तक गिर चुका था और एक्सपर्ट के अनुमान के मुताबिक यह स्तर फिलहाल एक अहम बॉटम की तरह काम कर सकता है। हालांकि, अगर कंपनी के आने वाले नतीजों में कोई बड़ी नकारात्मक स्थिति सामने आती है तो यह धारणा बदल सकती है।
जेके टायर के शेयर में 350 रुपये के आसपास का स्तर निवेशकों के लिए खास महत्व रखता है। एक्सपर्ट ने निवेशकों को सलाह दी कि वे अपना रिस्क मैनेजमेंट इसी स्तर को ध्यान में रखकर करें। मौजूदा ग्रोथ और वैल्यूएशन को देखते हुए 350 रुपये से नीचे का भाव आने की संभावना उन्हें बहुत ज्यादा नहीं लगती, जब तक कि कंपनी के प्रदर्शन में कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव न आए। इसका मतलब यह नहीं है कि 350 रुपये निश्चित रूप से फ्लोर है, बल्कि यह मौजूदा परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण तकनीकी और जोखिम प्रबंधन स्तर माना जा सकता है।
कंपनी की बिक्री में पिछले कुछ वर्षों में बदलाव भी देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2022-23 तक जेके टायर की बिक्री में अच्छी ग्रोथ दिखाई दी थी, लेकिन इसके बाद कारोबार में ठहराव नजर आया। एक्सपर्ट के मुताबिक यह समस्या सिर्फ JK Tyre की नहीं थी, बल्कि 2024 के आसपास कई सेक्टरों में अर्निंग्स ग्रोथ धीमी पड़ने लगी थी। बाजार में सितंबर 2024 के आसपास बने पीक के बाद आई कमजोरी के पीछे भी मुख्य वजह अर्निंग्स स्लोडाउन को माना गया। टैरिफ वॉर और अन्य घटनाएं चर्चा में जरूर थीं, लेकिन अंततः बाजार के लिए कंपनियों की कमाई सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होती है।
अब एक्सपर्ट का मानना है कि अर्निंग्स साइकिल में धीरे-धीरे रिवाइवल देखने को मिल रहा है। आम तौर पर एक-दो साल की कमाई में ठहराव के बाद अर्निंग्स ग्रोथ का नया चक्र शुरू हो सकता है। अगर यह रिवाइवल आगे दो से ढाई साल तक चलता है तो ऑटो और टायर सेक्टर को भी इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, जैसे-जैसे कंपनियों की कमाई का बेस ऊपर जाता है, वैसे-वैसे ग्रोथ रेट कम दिखाई देने लगता है। यही बाजार और अर्थव्यवस्था के साइकिल का सामान्य हिस्सा है।
एक साल के नजरिए से एक्सपर्ट बाजार को लेकर नकारात्मक नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर कंपनी को अपने कारोबार की ग्रोथ के साथ बाजार की अनुकूल हवा यानी मार्केट टेलविंड भी मिलती है तो JK Tyre को फायदा हो सकता है। करीब 15 गुना का वैल्यूएशन भी उन्हें बहुत बड़ी चिंता नहीं लगता। इसलिए 388 रुपये के आसपास खरीद वाले निवेशक के लिए फिलहाल मुख्य फोकस कंपनी के नतीजों, इनपुट कॉस्ट, मार्जिन और ऑटो सेक्टर की मांग पर होना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में एक्सपर्ट का अनुमान है कि 350 रुपये या उससे नीचे का स्तर, वर्तमान ग्रोथ को देखते हुए, तभी देखने को मिलेगा जब कंपनी के प्रदर्शन में कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव आता है।
(शेयर मंथन, 10 सितंबर 2026)
(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)