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पटरी पर लौटी अर्थव्यवस्था, अगले वित्त वर्ष में भी 6.5% रह सकती है वृद्धि दर: क्रिसिल

नरमी से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था उबरने लगी है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ताजे आँकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर 2024 के तीन महीनों के लिए आर्थिक वृद्धि दर 6.2% पर रही। इससे पहले दूसरी तिमाही के दौरान वृद्धि दर 6% से नीचे गिर गयी थी। इसे विश्लेषक घरेलू अर्थव्यवस्था के वापस पटरी पर लौटने की तरह देख रहे हैं।

7.6 करोड़ ईपीएफओ सदस्यों के लिए बड़ी खबर, पीएफ की ब्याज दरों में नहीं होगा बदलाव

कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन ने 2024-25 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 8.25% पर ही रखने का फैसला किया गया है। इससे 7 करोड़ से ज्यादा खाताधारकों को लाभ मिलेगा। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्ट्रीज की बैठक में यह फैसला लिया गया।

1 मार्च से बदल जाएंगे ये नियम! यूपीआई, एलपीजी और म्यूचुअल फंड से जुड़े होंगे बड़े बदलाव

मार्च के महीने की शुरुआत के साथ कुछ नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ेगा। एक मार्च से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों से लेकर बीम के प्रीमियम भुगतान के तरीकों तक में बदलाव हो जायेगा। इसके साथ ही म्यूचुअल फंड योजना में नॉमिनी जोड़ने से जुड़े नियम में भी बदलाव होने वाला है।

तुहिन कांत पांडे बने सेबी के नये प्रमुख, लेंगे माधबी पुरी बुच की जगह

केंद्र सरकार ने वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। पांडे की नियुक्ति को केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने गुरुवार को मंजूरी दी थी। वह मौजूदा सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 1 मार्च 2025 को समाप्त हो रहा है।

आर्थिक तरक्की में नयी जान फूँक सकते हैं जीडीपी आँकड़े, तीसरी तिमाही में 6.2% हुई वृद्धि

चालू वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.2% रही है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग (एनएसओ) ने शुक्रवार (28 फरवरी) को अक्टूबर-दिसंबर 2024 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि के आँकड़े जारी किये। ये आँकड़ शेयर बाजार के बंद होने के बाद जारी किये गये।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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