हालांकि अमेरिकी अर्थजगत में खराब आँकड़ों के आने का क्रम बरकरार है, लेकिन इसके बावजूद क्रिसमस की छुट्टी के पहले केवल दोपहर तक चले कारोबार में अमेरिकी शेयर बाजारों में हल्की बढ़त दर्ज की गयी। श्रम विभागद्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले हफ्ते बेरोजगारी के आवेदनों की संख्या में अनुमान से अधिक बढ़ोतरी हुई और यह नवंबर 1982 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। दूसरी ओर वाणिज्य विभाग ने कहा कि नवंबर महीने में उपभोक्ताओं द्वारा किये गये व्यय में 0.6% की कमी आयी। इस तरह उपभोक्ताओं द्वारा किये जाने वाले खर्च में लगातार पाँचवें महीने गिरावट दर्ज की गयी। बुधवार को कारोबार की मात्रा में काफी कमी देखने को मिली। नाइमेक्स में फरवरी डिलीवरी के कच्चे तेल की कीमत 3.63डॉलर गिर कर 35.35डॉलर प्रतिबैरल तक चली गयी।आज सुबह एशियाई बाजारों में मजबूती का रुख दिख रहाहै। निक्केई में 1% से अधिक की बढ़त है। शंघाई कंपोजिट, ताइवान वेटेड और स्ट्रेट्स टाइम्स में भी मजबूती है,हालांकि यह 1% से कम है। कॉस्पी औरजकार्ता कंपोजिट में हल्की गिरावट दिख रही है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।