मंगलवार को अमेरिकी निवेशकों ने सस्ते भावों पर जम कर खरीदारी की, जिससे डॉव जोंस 889 अंक उछल गया। आज सुबह एशिया में भी मजबूती ही दिख रही है। अमेरिकी बाजार में नकारात्मक खबरों का सिलसिला अभी थमा नहीं है और मंदी की आशंकाएं अभी बरकरार हैं। लेकिन उपभोक्ता विश्वास सूचकांक (कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स) घट कर 38 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ जाने की खबर को निवेशकों ने एकदम नजरअंदाज कर दिया। दरअसल आठ दिनों में डॉव जोंस में तकरीबन 2,400 अंक की गिरावट के बाद इस तरह की उछाल आयी है, लेकिन विश्लेषकों को अभी इस बात का भरोसा नहीं है कि यह तेजी ज्यादा टिक सकेगी। नाइमेक्स में कच्चे तेल का भाव 0.49 डॉलर गिर कर 62.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। आज सुबह चीन को छोड़ कर ज्यादातर एशियाई बाजारों में मजबूती है। निक्केई में 6% से भी ज्यादा की सबसे तेज उछाल है। स्ट्रेट टाइम्स, हैंग सेंग, ताइवान वेटेड, कॉस्पी और जकार्ता कंपोजिट में 1-3% की बढ़त दिख रही है। शंघाई कंपोजिट करीब 1% नीचे चल रहा है।
मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।