मंगलवार को अमेरिकी निवेशकों ने सस्ते भावों पर जम कर खरीदारी की, जिससे डॉव जोंस 889 अंक उछल गया। आज सुबह एशिया में भी मजबूती ही दिख रही है। अमेरिकी बाजार में नकारात्मक खबरों का सिलसिला अभी थमा नहीं है और मंदी की आशंकाएं अभी बरकरार हैं। लेकिन उपभोक्ता विश्वास सूचकांक (कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स) घट कर 38 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ जाने की खबर को निवेशकों ने एकदम नजरअंदाज कर दिया। दरअसल आठ दिनों में डॉव जोंस में तकरीबन 2,400 अंक की गिरावट के बाद इस तरह की उछाल आयी है, लेकिन विश्लेषकों को अभी इस बात का भरोसा नहीं है कि यह तेजी ज्यादा टिक सकेगी। नाइमेक्स में कच्चे तेल का भाव 0.49 डॉलर गिर कर 62.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। आज सुबह चीन को छोड़ कर ज्यादातर एशियाई बाजारों में मजबूती है। निक्केई में 6% से भी ज्यादा की सबसे तेज उछाल है। स्ट्रेट टाइम्स, हैंग सेंग, ताइवान वेटेड, कॉस्पी और जकार्ता कंपोजिट में 1-3% की बढ़त दिख रही है। शंघाई कंपोजिट करीब 1% नीचे चल रहा है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।