शेयर मंथन में खोजें

बराक ओबामा की शपथ – बड़ा दिन, बड़ी गिरावट

राजीव रंजन झा

अभी दो दिन पहले तक बाजार में जो एक हल्की तेजी बनी थी, उसके बारे में कहा जा रहा था कि यह बराक ओबामा के शपथ लेने से पहले का एक उत्साह है। लेकिन विडंबना देखिए, ठीक शपथ वाले दिन खुद अमेरिकी बाजारों में पिछले दो महीनों की सबसे तीखी गिरावट आयी है। इसे अमेरिकी इतिहास में किसी राष्ट्रपति के शपथ लेने वाले दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताया जा रहा है। ओबामा के शपथ लेने के बाद के भाषण ने बाजार को जरा भी सहारा नहीं दिया, और बाद में तो ऐसा माहौल बन गया जिसकी तुलना लेहमान ब्रदर्स के ढहने के ठीक बाद फैली बदहवासी से की जा रही है। एक अहम बात यह भी है कि बराक ओबामा के चुने जाने से लेकर शपथ ग्रहण के दिन तक डॉव जोंस ने 14% का नुकसान सहा है। लेकिन क्या यह बराक ओबामा से किसी निराशा का नतीजा है? शायद नहीं।

अपने शपथ ग्रहण भाषण में ओबामा ने केवल अमेरिकी जनता का उत्साह बढ़ाया, अपनी नीतियों के नये ब्यौरे सामने नहीं रखे। उनके लिए हमें थोड़ा इंतजार करना होगा। और इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि ओबामा आज अमेरिकी जनता की सबसे बड़ी उम्मीद के रूप में हमारे सामने हैं। लेकिन शेयर बाजार की कल की गिरावट अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकराल चुनौतियों का आइना है।
कल की अमेरिकी गिरावट में काफी बड़ा हाथ बैंकिंग और टेक्नोलॉजी शेयरों का रहा है। वजह सीधी है – इन कंपनियों का प्रदर्शन। कल ही बोस्टन स्थित स्टेट स्ट्रीट ने अपने निवेश पर 10 अरब डॉलर के ऐसे घाटे का खुलासा किया है, जिसे कंपनी के नतीजों में दिखाना बाकी है। ऐसे में अगर निवेशक न केवल इस शेयर से, बल्कि पूरे बैंकिंग क्षेत्र से अफरा-तफरी में भागने लगे तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। दुनिया की सबसे बड़े संस्थागत मनी मैनेजर मानी जा रही स्टेट स्ट्रीट का शेयर कल एक ही दिन में 59% टूट गया। बैंक ऑफ अमेरिका ने मेरिल लिंच को अपने हाथ में ले तो लिया, लेकिन अब उसका बोझ सहना इसे भारी पड़ रहा है। और अब खबरें आ रही हैं कि इंटेल ने अपने कर्मचारियों को इस तिमाही में घाटा होने का संकेत दे दिया है। यह दो दशकों में पहला मौका होगा, जब इंटेल जैसी कंपनी घाटे में जायेगी।
इन स्थितियों में हमें यह देखने की जरूरत नहीं है कि ओबामा के शपथ ग्रहण के दिन बाजार की चाल कैसी रही। हमें इंतजार करना होगा इस नये अमेरिकी प्रशासन के कदमों का।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख