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दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद गैस माइग्रेशन विवाद मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज को झटका

सरकार और रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के बीच गैस माइग्रेशन का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन माइग्रेशन विवाद मामले में आरआईएल को 2.81 अरब डॉलर का डिमांड नोटिस भेजा है। कंपनी को यह नोटिस दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भेजा गया है। 

फिर गरमाया गैस माइग्रेशन मामला

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आरआईएल और उसके साझेदारों को 2.81 अरब डॉलर यानी 24,522 करोड़ रुपये का डिमांड नोटिस भेजा है। मंत्रालय ने कंपनी को ये नोटिस दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले दे बाद भेजा है। दरअसल, ये मामला ओएनजीसी के केजी-डी6 से जुड़ा है जिसमें सरकार ने आरआईएल पर ये आरोप लगाया था कि उसने ओएनजीसी ब्लॉक से गैस का माइग्रेशन किया है। सरकार और आरआईएल और उसके साझेदारों का ये मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत तक भी पहुँचा था, जहाँ फैसला आरआईएल और उसके साझेदारों यानी रिलायंस लेड कंसोर्टियम के पक्ष में आया था। रिलायंस लेड कंसोर्टियम में ब्रिटिश पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) शामिल हैं।

मई 2023 में रिलायंस के पक्ष में आया था फैसला

सरकार ने पहले 1.55 अरब डॉलर की माँग की थी। ये मामला इंटरनेशनल कोर्ट में हारने के बाद सरकार दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ मई 2023 में एकल जज बेंच ने रिलायंस लेड कंसोर्टियम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मामले को खारिज कर दिया था।

हालाँकि, सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। इस बार जीत सरकार की हुई। डिवीजन बेंच ने 3 मार्च 2025 को सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। इसी के बाद सरकार की तरफ से 2.81 अरब डॉलर का नोटिस भेजा गया। सरकार की दलील है कि गैस माइग्रेशन से ओएनजीसी को काफी नुकसान हुआ है। इसके लिए रिलायंस और उसके साझेदार जिम्मेदार हैं। इसलिए उन्हें हर्जाना देना होगा।

पूरे मामले पर रिलायंस की सफाई

इस पूरे मामले पर रिलायंस लेड कंसोर्टियम ने अपने बयान में सरकार के लगाये सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एक्सचेंज फाइलिंग में आरआईएल ने कहा है कि वो दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी। कंपनी को इस मामले में किसी भी देनदारी की उम्मीद नहीं है।

(शेयर मंथन, 05 मार्च 2025)

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