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एसटीटी (STT) बढ़ने से आर्बिट्राज फंडों पर होगा असर : राधिका गुप्ता

आम बजट 2026-27 में प्रतिभूति लेन-देन कर यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में किये गये बदलाव ने निवेशकों और म्यूचुअल फंड उद्योग का ध्यान खींचा है।

इसका सबसे सीधा असर डेरिवेटिव बाजार या वायदा एवं विकल्प यानी फ्यूचर्स ऐंड ऑप्शंस (एफऐंडओ) से जुड़े लेन-देन पर पड़ता है। इडेलवाइज म्यूचुअल फंड की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राधिका गुप्ता (Radhika Gupta) ने लिंक्डइन पर साझा किये गये अपने विश्लेषण में इस बदलाव के प्रभाव को समझाया है। उनका आकलन यह संकेत देता है कि पहली नजर में नकारात्मक दिखने वाला यह कदम, वास्तविकता में सीमित और नियंत्रित असर वाला है। बजट 2026-27 के तहत फ्यूचर (Futures) सौदों पर एसटीटी की दर 0.02% से बढ़ा कर 0.05% कर दी गयी है। वहीं ऑप्शन (Options) के प्रीमियम पर एसटीटी 0.10% से बढ़ कर 0.15% हो गया है और ऑप्शन के एक्सरसाइज पर यह दर 0.125% से बढ़ा कर 0.15% की गयी है। ये बदलाव मुख्य रूप से उन निवेश रणनीतियों को प्रभावित करते हैं, जिनमें डेरिवेटिव का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस श्रेणी में आर्बिट्राज फंड सबसे प्रमुख हैं।

आर्बिट्राज फंड का स्वरूप यह होता है कि वे कैश और डेरिवेटिव बाजार के बीच मूल्य अंतर का लाभ उठाते हैं। ऐसे फंडों में आम तौर पर इक्विटी आर्बिट्राज का औसत हिस्सा लगभग 70% के आस-पास रहता है। इडेलवाइज द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, एसटीटी में वृद्धि के कारण कुल मिला कर 0.03% का अतिरिक्त एसटीटी भार आता है। यह भार प्रतिफल (Return)) पर अलग-अलग चरणों में प्रभाव डालता है। यदि रोलओवर से जुड़े लेन-देन को देखा जाये, तो प्रतिफल पर इसका असर लगभग 0.02% के आस-पास बैठता है। इसके अतिरिक्त, यदि पोर्टफोलियो के लगभग 20% हिस्से में चर्न यानी बार-बार सौदे बदलने की स्थिति बनती है, तो प्रतिफल पर लगभग 0.01% का अतिरिक्त प्रभाव आता है।

इन दोनों को मिला कर देखा जाये तो कुल वार्षिक प्रभाव लगभग 0.32% के आस-पास होता है। यह आँकड़ा सकल यानी ग्रॉस आधार पर है।
इडेलवाइज के विश्लेषण में कर (Tax) लगने के बाद की स्थिति को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है। यदि 7% का प्रतिफल माना जाये और आर्बिट्राज फंड पर 12.5% तथा लिक्विड फंड पर 30% की कर दर लागू की जाये, तो दोनों के बीच कर के बाद प्रतिफल का अंतर लगभग 1.23% रहता है। एसटीटी में वृद्धि के बाद यह अंतर घट कर करीब 0.90% रह जाता है। यानी एसटीटी बढ़ने के बावजूद आर्बिट्राज फंड की कर दक्षता बनी रहती है। हालाँकि उसका लाभ कुछ हद तक कम जरूर होता है। 

यह भी ध्यान देने योग्य है कि एसटीटी में वृद्धि का असर सभी फंडों पर समान रूप से नहीं पड़ता। उदाहरण के तौर पर, इडेलवाइज मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में इक्विटी आर्बिट्राज का औसत हिस्सा केवल 25% के आस-पास है। इस वजह से इस फंड पर एसटीटी वृद्धि का प्रभाव बेहद सीमित रहता है। इडेलवाइज के आँकड़ों के अनुसार, इस फंड के प्रतिफल पर असर लगभग 0.01% और वार्षिक आधार पर लगभग 0.08% के आस-पास आता है। इसी तरह इडेलवाइज अल्टीवा हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड की संरचना भी शुद्ध आर्बिट्राज पर आधारित नहीं है। इस फंड में इक्विटी और फिक्स्ड इनकम दोनों का संयोजन होता है और डेरिवेटिव की भूमिका सीमित रहती है। नतीजतन, एसटीटी में वृद्धि का असर इसके कुल प्रतिफल पर और भी कम पड़ता है।|

इडेलवाइज के विश्लेषण में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एसटीटी के प्रभाव को समझने के लिए कुछ मान्यताओं को ध्यान में रखा गया है। प्रतिफल से जुड़े आँकड़े केवल यह दिखाने के लिए हैं कि एसटीटी बढ़ने से लागत पर क्या असर पड़ता है। इन्हें भविष्य के प्रतिफल की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि निवेशक अक्सर ऐसे बदलावों को सीधे प्रतिफल से जोड़ कर देखते हैं, जबकि वास्तविक असर कई कारकों पर निर्भर करता है। 

इन आँकड़ों के आधार पर इडेलवाइज के निवेश निष्कर्ष स्पष्ट हैं। पहला, आर्बिट्राज फंड के प्रतिफल पर एसटीटी वृद्धि का असर होगा, लेकिन यह असर सीमित और प्रबंधनीय है। दूसरा, कर के बाद प्रतिफल के संदर्भ में आर्बिट्राज फंड अब भी लिक्विड फंड की तुलना में बेहतर स्थिति में बने रहते हैं। तीसरा, जिन फंडों में डेरिवेटिव का अनुपात कम है, वहाँ यह प्रभाव और भी कम हो जाता है।
बजट 2026-27 पर इडेलवाइज के समग्र आकलन के अनुसार, यह बजट बाजार को तात्कालिक उत्साह देने के बजाय दीर्घकालिक दिशा पर केंद्रित है। इक्विटी पक्ष से यह बजट संरचनात्मक मजबूती, रणनीतिक क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक उत्पादकता निवेश को प्राथमिकता देता है। 

वहीं फिक्स्ड इनकम के नजरिये से, वित्तीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखने और कर्ज से जुड़े संकेत बॉन्ड बाजार के लिए महत्वपूर्ण माने गये हैं। एसटीटी में वृद्धि को इसी नीतिगत दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा सकता है। इसका उद्देश्य अत्यधिक सट्टा आधारित गतिविधियों को कुछ हद तक नियंत्रित करना और बाजार को अधिक संतुलित बनाना है। दीर्घकालिक निवेशकों और सुव्यवस्थित फंड रणनीतियों के लिए इसका असर सीमित रहने वाला है।
निवेशकों के लिए संदेश साफ है। किसी एक कर बदलाव को देख कर निवेश निर्णय बदलने के बजाय पूरे निवेश ढाँचे, कर संरचना और फंड की रणनीति को साथ रख कर देखना जरूरी है। आर्बिट्राज फंड अब भी कम अस्थिरता और कर दक्षता के लिए अनुकूल विकल्प बने हुए हैं, जबकि मल्टी एसेट और हाइब्रिड फंड जैसी विविध रणनीतियाँ ऐसे बदलावों के प्रभाव को और भी सीमित कर देती हैं।

(शेयर मंथन, 3 फरवरी 2026)

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