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सेंसेक्स कंपनियों के तिमाही मुनाफे में कमी

राजीव रंजन झा

सेंसेक्स की 30 में से 28 कंपनियों के तिमाही नतीजे अब तक सामने आ चुके हैं। एसीसी और डीएलएफ के नतीजे अभी बाकी हैं। इन नतीजों से उभरी ज्यादा सुहावनी नहीं है, लेकिन अगर विश्व बाजार की स्थिति को ध्यान में रखें तो ज्यादा डरावनी भी नहीं है। शेयर मंथन के विश्लेषण के मुताबिक इन 28 कंपनियों का कुल मुनाफा साल-दर-साल 8.96% घटा है। तिमाही-दर-तिमाही स्थिति और बुरी नजर आती है, क्योंकि वहाँ गिरावट 13.69% की है। अगर इन कंपनियों की कुल बिक्री देखें तो साल-दर-साल जरूर 9.01% की बढ़त है, लेकिन तिमाही-दर-तिमाही 8.20% की गिरावट आयी है।

इस तरह अक्टूबर-दिसंबर तिमाही खराब रहने की आशंकाएँ सही साबित हो चुकी हैं, लेकिन यह स्थिति वैसी नहीं है, जितनी भयावह तस्वीरें बनायी जा रही थीं। और फिर, तिमाही-दर-तिमाही स्थिति ज्यादा कमजोर इसलिए लग रही है कि जुलाई-सितंबर की तिमाही तक भारतीय कंपनियों की कारोबारी रफ्तार काफी अच्छी चलती रही थी। तस्वीर अचानक ही अक्टूबर महीने से बदलती दिखी थी।
इस माहौल में भी सेंसेक्स की इन 28 में से 8 कंपनियों ने अपने मुनाफे में 10% से ज्यादा साल-दर-साल बढ़त दर्ज की है। इनमें भी 7 कंपनियों की बढ़त 20% से ज्यादा है। दूसरी तरफ 12 कंपनियों के मुनाफे में साल-दर-साल 10% से ज्यादा गिरावट आयी है। अगर बिक्री की बात करें तो इन 28 में से केवल 9 कंपनियों ने साल-दर-साल गिरावट दर्ज की है और इनमें 10% से ज्यादा गिरावट वाली कंपनियों की संख्या केवल 2 है। दूसरी ओर 17 कंपनियों ने साल-दर-साल 10% से ज्यादा बढ़त हासिल की है, जबकि 20% से ज्यादा बढ़त वाली कंपनियों की संख्या 14 है।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि मुनाफे में कमी दिखाने वाली ज्यादातर कंपनियों को इस तिमाही में विदेशी मुद्रा के बड़े घाटे सहने पड़े हैं। अगर विदेशी मुद्रा घाटों को हटा कर देखा जाये, तो तस्वीर बुरी नहीं लगती। अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में या कह लें कि पिछला पूरे साल ही विदेशी मुद्रा की चाल तमाम विश्लेषकों को छकाती रही है। ऐसे में इन कंपनियों को चोट सहनी पड़ी, तो इसमें आश्चर्य की ज्यादा बात नहीं है। लेकिन यह जरूर कहना होगा कि बीती तिमाही ने तमाम कंपनियों के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है और अगले 12 महीने इन सबके लिए परीक्षा की घड़ी साबित होंगे।

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