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मध्य पूर्व युद्ध से बढ़ते दबाव पर आईईए, आईएमएफ, विश्व बैंक और डब्ल्यूटीओ ने जतायी साझा चिंता

वॉशिंगटन से जारी एक साझा बयान में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक समूह और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रमुखों ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध पर चिंता जतायी है।

इस युद्ध के ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक प्रभावों की समीक्षा के लिए इन चारों संस्थाओं के प्रमुखों ने 28 मई को एक बैठक की, जिसके बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि यह युद्ध विभिन्न देशों और क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक और असमान प्रभाव डाल रहा है। इस बयान में कहा गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी दृढ़ता दिखा रही है, लेकिन संघर्ष का प्रभाव सबसे कमजोर देशों पर कहीं अधिक अनुपात में पड़ रहा है। ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतें, बढ़ती अनिश्चितता और रोजगार एवं आजीविका पर मँडरा रहे जोखिमों का इन देशों पर अधिक प्रभाव हो रहा है। बयान में कहा गया कि कई देशों में बुवाई का मौसम शुरू होने के कारण उर्वरकों की ऊँची कीमतें विशेष रूप से चिंताजनक हैं।

इन चारों संस्थाओं ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से आपूर्ति में भारी कमी के कारण वैश्विक तेल भंडार रिकॉर्ड गति से घट रहे हैं। यदि समुद्री परिवहन सामान्य स्थिति में नहीं लौटता है, तो उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों के दौरान तेल की उच्च माँग से पहले तेल भंडार में लगातार तेज गिरावट ईंधन सुरक्षा, बाजार की स्थिति और व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। इस बैठक में युद्ध के प्रभावों की समीक्षा की गयी, सबसे अधिक प्रभावित देशों और क्षेत्रों की स्थिति पर चर्चा हुई तथा जरूरतमंद देशों को सहायता देने के लिए समन्वित प्रयासों पर विचार किया गया। इसके साथ ही बहुपक्षीय और द्विपक्षीय उपायों के माध्यम से सामूहिक सहयोग को और मजबूत बनाने के विकल्पों पर भी चर्चा की गयी।

संयुक्त बयान में उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा एवं आर्थिक घटनाक्रमों और विभिन्न नीतिगत उपायों की लगातार निगरानी के महत्व पर जोर दिया गया। संस्थाओं ने कहा कि वे संघर्ष के आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए विभिन्न सरकारों द्वारा उठाये गये कदमों का अध्ययन और विश्लेषण कर रही हैं, ताकि पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके, अनुभव साझा किये जा सकें और उभरते जोखिमों की पहचान की जा सके। चारों संस्थाओं ने कहा कि उभरती स्थितियों पर नजर रखने के लिए वे लगातार संपर्क में रहेंगी और सबसे अधिक प्रभावित देशों एवं वैश्विक आर्थिक स्थिरता के समर्थन के लिए अपने प्रयासों का समन्वय जारी रखेंगी।

(शेयर मंथन, 30 मई 2026)

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