कच्चे तेल की कीमत में गिरावट जारी है। यह अब 57 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है। न्यूयार्क मर्केटाइल एक्सचेंज में बुधवार को यह 56.16 डालर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। वहींलंदन में बुधवार को ब्रेंट नार्थ सी कच्चा तेल भी 3.34 डालर प्रति बैरल गिरकर 52.37 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जुलाई में तेल की कीमतों के 147 डालर के शीर्ष स्तर पर पहुंचने के बाद से अब तक इसमें 60% तक की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञ ऐसा अनुमान लगा रहे हैं कि इन परिस्थितियों के चलते आज अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी अपनी रिपोर्ट में कच्चे तेल की मांग में भारी कमी का घोषणा कर सकती है। दूसरी तरफ ओपेक अपनी अगली बैठक से पहले ही कच्चे तेल के उत्पादन में और कमी का ऐलान कर सकता है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।