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तेल-गैस में रिलायंस सबसे ज्यादा पसंद, लक्ष्य 1,550 रु.: सीएलएसए

सीएलएसए ने भारत के तेल-गैस क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपना सबसे पसंदीदा शेयर मानते हुए इसका लक्ष्य भाव 1,550 रुपये रखा है। सीएलएसए की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इसके तेल-गैस विश्लेषक सोमशंकर सिन्हा का कहना है कि रिलायंस की नयी परियोजनाएँ न केवल इसे रिफाइनिंग और केमिकल्स कारोबार में मौजूदा गिरावट के दौर से उबरने में मदद करेंगीं, बल्कि अगले 2 सालों में इसकी आमदनी में काफी अच्छा इजाफा भी करेंगीं।

रिलायंस पावर के शेयर उछले

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में आज के कारोबार में रिलायंस पावर के शेयर भाव में बढ़त का रुख है। कंपनी का शेयर भाव आज के कारोबार में 109 रुपये का ऊँचा स्तर छूने के बाद सुबह 11.37 बजे 3.6% की बढ़त के साथ 106.35 रुपये पर था। अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर ने झारखंड में तिलैया में 4000 मेगावॉट की विद्युत परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगायी है। 

टाटा कम्युनिकेशंस का मुनाफा 203% बढ़ा

टाटा कम्युनिकेशंस के लाभ में 203% की भारी बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का लाभ अक्टूबर-दिसंबर 2008 की तिमाही में 80.95 करोड़ रुपये रहा है, जबकि पिछले वर्ष 2007 की इसी तिमाही में यह 26.71 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी की आमदनी में भी वृद्धि हुई है। साल 2008 की दिसंबर तिमाही में इसे 1022.73 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि साल 2007 की इसी तिमाही में इसकी आय 922.64 करोड़ रुपये रही थी।

सस्ता तेल : बढ़िया है!

राजीव रंजन झा

आखिरकार केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) के दाम सस्ते करने का फैसला कर ही लिया। आपके घर पर जब रसोई गैस का अगला सिलिंडर आयेगा तो आपको 25 रुपये कम देने होंगे। जब आप अगली बार पेट्रोल पंप जायेंगे तो वहाँ भी आपकी जेब कुछ कम हल्की होगी – पेट्रोल के लिए 5 रुपये और डीजल के लिए 2 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से।

नयी सरकारी पहल से डॉव जोंस उछला, एशिया में हरियाली

डूबे कर्जों की समस्या निपटाने के बारे में नये अमेरिकी प्रशासन के उपायों की उम्मीद ने अमेरिकी शेयर बाजारों को उत्साहित किया है। इससे बुधवार को जहाँ डॉव जोंस में 201 अंकों और नैस्डैक में 53 अंकों की बढ़त रही। आज गुरुवार की सुबह एशियाई बाजारों में हरियाली दिख रही है। खस्ताहाल अमेरिकी अर्थव्यवस्था से चिंतित निवेशकों को इस खबर ने उत्साहित कर दिया कि अर्थव्यवस्था पर डूबे कर्जों के असर को कम करने के लिए नयी सरकार इन्हें खरीदने की योजना बना रही है।

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