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आखिरी घंटे की खरीदारी से सेंसेक्स 744 अंक उछला

कारोबारी हफ्ते के अंतिम दिन भारतीय बाजार में जबरदस्त तेजी रही। बीएसई का सेंसेक्स 744 अंक यानी 8.22% की शानदार बढ़त के साथ 9,788 पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी भी 189 अंक या 7% की उछाल के साथ 2886 पर बंद हुआ। आज की तेजी में सबसे ज्यादा योगदान धातु, तेल-गैस, बैंकिंग, ऑटो और आईटी क्षेत्रों का रहा। बीएसई में इन सभी क्षेत्रों के सूचकांक तकरीबन 6-10% की शानदार उछाल के साथ बंद हुए।

औसत भाव का सवाल

राजीव रंजन झा

आपने एक शेयर खरीदा था जिसके भाव काफी नीचे आ गये, तो अब उस शेयर को और खरीद कर अपनी औसत लागत घटानी चाहिए या नहीं?

बिकवाली रुकना सबसे महत्वपूर्ण

शोमेश कुमार, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग

अभी कुछ समय तो बिकवाली सौदे कटने का रुझान रहेगा। साथ ही मेरिल लिंच ने उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट) पर सकारात्मक रिपोर्ट दी है और इसमें भारत और चीन के चुनिंदा शेयरों के पक्ष में सलाह दी है, जिससे माहौल थोड़ा सुधरेगा।

सिंगापुर निफ्टी 200-225 अंक ऊपर

कल अमेरिकी बाजार में काफी उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार 2-2.5% की मजबूती रही, लेकिन आज सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख है।

400 अंक की उठापटक के बाद सेंसेक्स 36 अंक ऊपर बंद

भारतीय शेयर बाजार आज जबरदस्त उतार-चढ़ाव के बाद अंत में बेहद सपाट बंद हुआ। मजबूत अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बीच आज सुबह सेंसेक्स ने मुहुर्त कारोबार के बंद स्तर 9008 की तुलना में तकरीबन 200-250 अंक तक की तेजी दिखायी। सुबह सेंसेक्स का खुला स्तर 9,298 का रहा, जहाँ सेंसेक्स 290 अंक मजबूत था और यही दिन का सबसे ऊँचा स्तर भी रहा। लेकिन बाजार खुलने के आधे घंटे बाद ही इसमें गिरावट शुरू हो गयी और घंटे भर के भीतर सेंसेक्स 8,900 के नीचे दिख रहा था। दरअसल इसी समय सेंसेक्स ने 8,894 का दिन का सबसे निचला स्तर भी छुआ।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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