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क्या एबॉट इंडिया शेयरों में 10 साल के लिए निवेश बनेगा भरोसेमंद दांव?

अवनी जानना चाहते हैं कि उन्हें पर्सिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 1 लाख रुपये का निवेश किया है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि अबाउट इंडिया एक बहुत ही हाई क्वालिटी फार्मा कंपनी मानी जाती है और लंबे समय से मजबूत फंडामेंटल्स के कारण निवेशकों के पोर्टफोलियो में शामिल रही है। यह ऐसा स्टॉक है जिसे आमतौर पर “पोर्टफोलियो स्टॉक” कहा जाता है, यानी ऐसा शेयर जिसे लंबे समय तक पकड़े रखने की सोच के साथ खरीदा जाता है। कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसका मजबूत बिजनेस मॉडल है। अबाउट इंडिया लगातार अच्छा रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) जनरेट करती है, कंपनी पर लगभग कोई कर्ज नहीं है और मार्जिन प्रोफाइल काफी मजबूत रहती है। यही वजह है कि बाजार इसे प्रीमियम वैल्यूएशन देता है। आमतौर पर यह शेयर 40 गुना के आसपास के पी/ई मल्टीपल पर भी खुद को सपोर्ट कर लेता है, इसलिए मौजूदा स्तरों पर वैल्यूएशन बहुत ज्यादा जोखिम भरा नहीं लगता, खासकर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए। 

ग्रोथ के मोर्चे पर देखें तो हाल के एक-दो क्वार्टर में ग्रोथ थोड़ी सुस्त जरूर रही है, लेकिन सालाना आधार पर कंपनी करीब 10% के आसपास की सेल्स ग्रोथ बनाए रखने में सक्षम रही है। इसके साथ-साथ मार्जिन मजबूत होने के कारण प्रॉफिटेबिलिटी लगातार अच्छी बनी हुई है। 10 साल के नजरिये से देखें तो अबाउट इंडिया जैसी स्थापित ब्रांड वैल्यू, मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और मल्टीनेशनल पैरेंटेज वाली कंपनी में सर्वाइवल का जोखिम बहुत कम माना जा सकता है। हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि यह स्टॉक बहुत ज्यादा आक्रामक रिटर्न देने वाला नहीं होता। इसकी चाल आमतौर पर ऐसी रहती है कि कुछ साल यह फ्लैट रह सकता है और किसी साल अचानक 25-30% का रिटर्न दे देता है। इसलिए इससे बाजार से बहुत ज्यादा ऊपर के रिटर्न की बजाय, मार्केट से जुड़े हुए स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न की उम्मीद रखना ज्यादा व्यावहारिक है।

अगर कोई निवेशक 10 साल का धैर्य रख सकता है और बाजार से जुड़े औसत 14-15% CAGR रिटर्न से संतुष्ट है, तो अबाउट इंडिया उसके लिए एक अच्छा वेल्थ क्रिएटर स्टॉक बन सकता है। यह कोई तेज रफ्तार मल्टीबैगर नहीं, बल्कि एक स्थिर, भरोसेमंद और क्वालिटी-ड्रिवन लॉन्ग टर्म कंपाउंडर की तरह देखा जाना चाहिए, जहां उतार-चढ़ाव के बावजूद बिजनेस की मजबूती निवेश को टिकाए रखने का भरोसा देती है।


(शेयर मंथन, 30 दिसंबर 2025)

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