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सुजलॉन के शेयर में 47 रुपये पर खरीदारी करने वाले निवेशक क्या करें?

सुजलॉन के शेयर को लेकर एक निवेशक ने सवाल पूछा कि उन्होंने करीब 47 रुपये के भाव पर 3,500 शेयर खरीदे हैं और फिलहाल शेयर में नुकसान चल रहा है।

निवेशक के पोर्टफोलियो में Reliance और HDFC जैसे शेयर भी हैं, जिनमें भी इस समय नुकसान बताया गया। ऐसे में सवाल था कि Suzlon में मौजूदा स्थिति में क्या रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि सुजलॉन में अभी गिरावट पूरी तरह खत्म हो गई है, ऐसा स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। हालांकि, करीब 40.8 रुपये के आसपास से शेयर में तेजी की शुरुआत दिखाई दी है और थोड़ा रिट्रेसमेंट देखने के बाद करेक्शन खत्म होने की संभावना बन सकती है। उन्होंने कहा कि करीब 37 रुपये का स्तर एक महत्वपूर्ण मार्कर है। 37 रुपये या उसके आसपास 35 रुपये तक की कमजोरी को लेकर बहुत ज्यादा जद्दोजहद करने के बजाय इस स्तर पर शेयर के व्यवहार को देखना चाहिए।

मौजूदा करेक्शन सुजलॉन में आखिरी बड़े करेक्शन के चरणों में से एक हो सकता है। अगर शेयर 37 रुपये के आसपास टिकता है या 35 रुपये तक जाकर संभलता है तो आगे स्थिति बेहतर हो सकती है। दूसरी स्थिति में शेयर कुछ समय तक इन्हीं स्तरों के आसपास कंसोलिडेट कर सकता है और तत्काल कोई बड़ी चाल देखने को नहीं मिलेगी।

बातचीत में यह सवाल भी उठा कि 47 रुपये के भाव पर खरीदे गए सुजलॉन जैसे उतार-चढ़ाव वाले शेयर को कैसे संभाला जाए, क्योंकि ऐसे शेयरों में यह अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि कीमत 60 रुपये की तरफ जाएगी या वापस 40 रुपये के आसपास आ जाएगी। इस पर विशेषज्ञ ने कहा कि केवल खरीद भाव को देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि उस समय के चार्ट स्ट्रक्चर और रिस्क मैनेजमेंट को आधार बनाना चाहिए।

उन्होंने उदाहरण के जरिए समझाया कि अगर किसी निवेशक ने 2025 के दौरान करीब 47 रुपये के स्तर पर Suzlon खरीदा था और वहां डबल बॉटम जैसा फॉर्मेशन बना था, तो उस स्तर पर स्टॉप लॉस तय किया जा सकता था। इसके बाद शेयर में तेजी आई और कीमत करीब 70-72 रुपये तक पहुंची। पिछले फॉर्मेशन को देखते हुए 70-71 रुपये के आसपास एक प्रॉफिट-बुकिंग जोन बन सकता था और इसके बाद करीब 75 रुपये तक एक्सटेंशन देखने को मिल सकता था। ऐसे स्तरों पर ट्रेडिंग पोजीशन में कम से कम कुछ हिस्से का मुनाफा बुक करने की रणनीति अपनाई जा सकती थी।

हालांकि, अगर उस समय प्रॉफिट बुकिंग का मौका निकल गया तो आगे रिस्क मैनेजमेंट और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञ ने Suzlon के 200-DMA का उदाहरण देते हुए कहा कि शेयर पहले करीब 60 रुपये के स्तर तक आया और वहां से बाउंस भी हुआ, लेकिन जब दोबारा 200-DMA का स्तर टूट गया तो यह कमजोरी का ज्यादा स्पष्ट संकेत बन गया। ऐसी स्थिति में निवेशक को अपने जोखिम को नियंत्रित करने के लिए पोजीशन कम करने पर विचार करना चाहिए था, भले ही शेयर का कॉस्ट प्राइस 47 रुपये हो।

उन्होंने 2026 में 47 रुपये के आसपास खरीदारी की एक दूसरी संभावित स्थिति भी समझाई। अगर वहां गैप फॉर्मेशन बना है और उसका सपोर्ट कायम है, तो निवेशक उस मोमेंटम को राइड कर सकता है। लेकिन बाद में अगर शेयर लगातार कमजोर होकर 200-DMA तोड़ देता है, तो रिस्क मैनेजमेंट के तहत पोजीशन से निकलने का संकेत मिल सकता है। उनके मुताबिक केवल इस वजह से किसी शेयर को होल्ड करते रहना उचित नहीं है कि उसका खरीद भाव मौजूदा बाजार भाव से ऊपर है।


(शेयर मंथन, 29 सितंबर 2026)

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