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क्या ऑटो सेक्टर में ICE और EV दोनों की ग्रोथ जारी रहेगी?

ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर बातचीत में भारत में वाहनों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता विकसित और कई विकासशील देशों की तुलना में कम होने की बात कही गई।

भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को अभी और विकसित होने में समय लगेगा। ऐसे में निजी वाहनों की मांग के लिए आगे भी अवसर मौजूद रह सकते हैं। उन्होंने वाहन को आज की जरूरतों में शामिल होने वाली महत्वपूर्ण श्रेणी के तौर पर भी देखा।

ऑटो सेक्टर की संभावनाओं पर बात करते हुए अनुमान जताया गया कि भारत में इस साल करीब 40–50 लाख पैसेंजर कार/फोर-व्हीलर और लगभग 2.4 करोड़ टू-व्हीलर का स्तर हो सकता है। अगले 8–10 वर्षों में फोर-व्हीलर की संख्या करीब 1 करोड़ और टू-व्हीलर की संख्या करीब 3–3.2 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान बातचीत में रखा गया। इसके आधार पर ऑटो इंडस्ट्री में औसतन करीब 10% प्लस-माइनस ग्रोथ रहने की संभावना व्यक्त की गई।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती हिस्सेदारी के बीच इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाहनों के भविष्य पर भी चर्चा हुई। वक्ता ने कहा कि उनके अनुसार ICE इंजन अचानक खत्म होने वाला नहीं है और EV भी आगे बढ़ता रहेगा। यानी आने वाले समय में दोनों टेक्नोलॉजी के साथ-साथ आगे बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक लोकलाइजेशन रहेगा।

EV क्षेत्र में लोकलाइजेशन की स्थिति बताते हुए कहा गया कि टू-व्हीलर EV में करीब 80–85% तक लोकलाइजेशन हासिल किया जा चुका है, जबकि फोर-व्हीलर EV में अभी और काम करने की जरूरत है। इसके लिए पूरी ऑटो इंडस्ट्री और सप्लाई चेन को मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई गई। बातचीत में यह भी संकेत दिया गया कि EV और ICE के बीच बदलाव के दौर में स्थानीय उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करना भारतीय ऑटो सेक्टर की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।


(शेयर मंथन, 01 अक्टूबर 2026)

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