शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

सपाट बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में (Sensex) 3.28 अंक की मामूली बढ़त

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार सपाट बंद हुआ है। बीएसई सेंसेक्स (Sensex) 3.28 अंक (0.01%) की मामूली बढ़त के साथ
25,341.86 पर बंद हुआ। 

इसका दिन का ऊपरी स्तर 25479.62 का रहा, जबकि नीचे की ओर यह 25223.22 तक फिसला। एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 3.20 अंक (0.04%) की हल्की तेजी के साथ 7,738.40 पर बंद हुआ। सत्र के मध्य में यह 7,777.60 तक ऊपर चढ़ा। दूसरी ओर इसका दिन का निचला स्तर 7,702.00 रहा। निफ्टी में मार्च में 10% की बढ़ते आयी है।आज के कारोबार में पावर, रिल्टी, आईटी, एफएमसीजी और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए वहीं मेटल और एनर्जी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव रहा। इंडिया वीआईएक्स (VIX) सूचकांक 1.33% गिर कर 16.5825 पर बंद हुआ।

छोटे-मॅंझोले शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई मिडकैप में 0.68% की और बीएसई स्मॉल कैप में भी 0.46% की मजबूती आयी। दूसरी ओर निफ्टी मिडकैप 100 0.81% और निफ्टी स्मॉल 100 0.59% चढ़ कर बंद हुए।

आज के कारोबार में सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में टीसीएस में 1.11%, इन्फोसिस में 1.01%, सन फार्मा में 0.97%, हिंदुस्तान यूनिलीवर में 0.79%, अदाणी पोर्ट्स में 0.75% और हीरो मोटोकॉर्प में 0.72 % की मजबूती आयी। वहीं एसबीआई में 1.65%, टाटा स्टील में 1.51%, कोल इंडिया में 1.50%, एशियन पेंट्स में 1.44%, ओएनजीसी में 1.42%, और बीएचईएल में 0.96% की गिरावट आयी। निफ्टी 50 के 50 शेयरों में से 25 शेयर लाल निशान पर बंद हुए और 25 शेयर हरे निशान पर रहे। (शेयर मंथन, 31 मार्च 2016)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख