गुरुवार को एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान लाल निशान दिख रहे हैं।
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को एशियाई बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई है।
कारोबारी सप्ताह के आखरी दिन शुक्रवार को एशियाई बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई है।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों के अधिकतर सूचकांक लाल निशान में हैं।
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट के साथ शुरू हुई है।
सोमवार को अमेरिकी बाजार में गिरावट के बाद मंगलवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिल रही है।
अमेरिकी बाजार के बाद बुधवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है।
अमेरिकी शेयर बाजार से मिले कमजोर संकेतों के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार में कमजोरी देखने को मिल रही है।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों में गिरावट देखी जा रहा है। सभी एशियाई सूचकांकों में गिरावट है। भारतीय समय के मुताबिक 8.40 बजे चीन का सूचकांक शंघाई कंपोजिट (Shanghai Composit) 0.39% गिर कर लाल निशान पर चल रहा है।
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को एशियाई बाजारों में गिरावट है। ताइवान के अलावा सभी सूचकांकों में गिरावट है।
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शुरुआती कारोबार एशियाई बाजारों में गिरावट है।
बुधवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों में कमजोरी देखी जा रही है।
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों में गिरावट दिख रही है।
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार में गिरावट है।
अमेरिकी शेयर बाजार के कमजोर बंद होने के बाद गुरुवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट है।
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को एशिया बाजारों में गिरावट है।
फेडरल रिजर्व की अध्यक्ष जेनेट एलन के बयान के बाद अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से मिले अच्छे संकेतों के बीच गुरूवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों में गिरावट है।
बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान एशियाई बाजारों में बिकवाली देखने को मिल रही है।
अमेरिकी शेयर बाजार से मिले कमजोर संकेतों के कारण कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है।
अमेरिकी शेयर बाजार के बाद गुरुवार को शुरआती कारोबार में एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है।
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हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।