हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 6,400-6,565 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (सितम्बर) की कीमतों में 5,860 रुपये के पास अड़चन के साथ 5,730-5,650 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
हल्दी वायदा की कीमतें पिछले सप्ताह के दौरान दर्ज बढ़त को बनाये रखने में सक्षम नहीं हो सकती है क्योंकि माँग की तस्वीर इतनी मजबूत नहीं है कि यह कीमतों में आगे भी इजाफा कर सके।
हल्दी वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 6,430-6,500 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
स्थिर माँग और हल्दी की फसल में अच्छी प्रगति के कारण हल्दी वायदा (सितंबर) की वायदा कीमतों पर लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखा गया।
हल्दी वायदा (अप्रैल) में निचले स्तर पर खरीदारी की कारण शॉर्ट कवरिंग हो सकती है और कीमतों को 7,050 के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है।
हाजिर बाजारों से नकारात्मक संकेत के कारण हल्दी वायदा (नवम्बर) की कीमतों में 5,700 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतें एक महीने के निचले स्तर के नजदीक कारोबार कर रही हैं और कीमतें यदि 6,030 रुपये के स्तर से नीचे टूटती है तो आगे 5,800-5,700 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
हल्दी वायदा (सितम्बर) की कीमतों में उच्च स्तर से 6,050 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतें 5,785 रुपये के पास बाधा का सामना कर रही है और 5,700-5,650 रुपये के स्तर तक गिरावट होने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 6,650-6,600 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 6,500 रुपये तक लुढ़कने की संभावना है।
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हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।