कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किये जाने की संभावना हैं और कीमतों को 2,980 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 2,780 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कोरोना वायरस मामलों के बढ़ोतरी के बीच ईंधन की माँग में वृद्धि को लेकर चिंता और एक नये स्टीमुलस सौदे पर संयुक्त राज्य में वार्ता रुकने से कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर से फिसल गयी है।
कच्चे तेल की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं और कीमतों को 3,290 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 3,080 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ कारोबार करने की संभावना हैं और कीमतों को 4,380 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 4,280 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित कारोबार करने की संभावना हैं और कीमतों को 4,320 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 4,240 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बरकरार रह सकती है। कच्चे तेल की कीमतें 3,870-3,940 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बरकरार रह सकती है और यह 3,790-3,850 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं और कीमतों को 3,180 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 3,020 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल में उच्च स्तर पर मुनाफा वसूली होने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नरमी के रुझानों के कारण कच्चे तेल की कीमतें गिरावट के साथ खुल सकती है और कीमतें 4,150-4,230 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़त के साथ खुल सकती है और कीमतें 4,100-4,160 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।