सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,400-3,440 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की 70.64 से 68.46 तक मजबूती के साथ ही ऑयलमील के कम निर्यात जैसे कई कारणों से सोयाबीन वायदा की कीमतें पिछले तीन महीने से गिरावट के साथ कारोबार कर रही हैं।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की 70.64 से 68.46 तक मजबूती के साथ ही ऑयल मील के कम निर्यात जैसे कई कारणों से सोयाबीन वायदा की कीमतें पिछले तीन महीने से गिरावट के साथ कारोबार कर रही है।
सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतें 2,930-3,000 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
सोयाबीन वायदा (मई) की कीमतों के 3,710-3,760 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
सोयाबीन वायदा (नवंबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,900-3,920 रुपये के स्तर पर पहुँचने की संभावना है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की 70.64 से 68.46 तक मजबूती के साथ ही ऑयलमील के कम निर्यात जैसे कई कारणों से सोयाबीन वायदा की कीमतें पिछले तीन महीनों से गिरावट के साथ कारोबार कर रही हैं।
सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों में कल 0.7% की बढ़त दर्ज की गयी। अब यदि कीमतें 5,800 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 6,100 रुपये तक बढ़त दर्ज की जा सकती है।
सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,500-3,600 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (सितंबर) की कीमतों पर उच्च स्तर से कुछ दबाव देखा गया है और इस कारण कीमतों के 8,700 रुपये पर रुकावट के साथ 7,100-7,000 के स्तर तक गिरावट जारी रहने की संभावना है।
बेमौसम बारिश के कारण आवक में देरी होने की खबरों से सोयाबीन वायदा (नवंबर) की कीमतों में पिछले सप्ताह 3% से अधिक की वृद्धि हुई है।
सोयाबीन वायदा (जुलाई) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 7,500-7,700 रुपये के स्तर पर पहुँचने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले बेहतर संकेतों के कारण सोयाबीन वायदा (जून) की कीमतों में 6,970-7,000 रुपये तक बढ़ोतरी होने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (मई) की कीमतों में 3,790 रुपये तक गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 3,750-3,720 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ 3,850-3,900 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।