हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 8,000-8,800 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने की संभावना है।
टेक्निकल बिकवाली के कारण हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतें कल गिरावट के साथ बंद हुई।
हल्दी वायदा (नवम्बर) की कीमतों में 5,700-5,650 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है और कीमतों को 5,750 रुपये के पास सहारा और 5,900 रुपये के स्तर पर रुकावट रह सकता है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में पिछले हफ्ते रिकवरी दर्ज की गयी क्योंकि नियार्त माँग की उम्मीद के कारण हाजिर बाजार में माँग में बढोतरी हो रही है।
निचले स्तर पर खरीदारी के कारण हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतें सोमवार को मामूली बढ़त के साथ बंद हुई।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 8,000-7,900 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है। हल्दी की कीमतें पिछले महीने बढ़ गयी थी क्योंकि माँग की तुलना में आपूर्ति कम थी।
हल्दी वायदा (दिसंबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ कारोबार करने की संभावना है और कीमतों 5,850 के स्तर पर बाधा के साथ 5,750-5,700 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में तेजी जारी रहने की संभावना है और कीमतें 7,900-8,100 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 7,450-7,620 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 6,350-6,500 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 6,400-6,545 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (सितंबर) की कीमतें 6,850-7,050 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार कर सकती है।
हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 5,680-5,750 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (मई) की कीमतों के 8,100-8,400 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 8,000-7,900 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अगस्त) की कीमतों के 6,790-7,000 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतें 7,700-7,900 रुपये के दायरे में साइडवेज कारोबार कर सकती हैं।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।