चाँदी के बाजार में इस समय काफी अस्थिरता देखने को मिल रही है। हाल के महीनों में चाँदी 76 डॉलर से गिरकर 66 डॉलर तक पहुंच चुकी है, जिससे साफ है कि यह धातु इक्विटी बाजार से भी ज्यादा वोलाटाइल हो सकती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि फिलहाल सोना और चाँदी दोनों की दिशा लगभग एक जैसी बनी हुई है और दोनों पर अंतरराष्ट्रीय डॉलर कीमतों का ही असर है। पहले चांदी को सोने की तुलना में बेहतर विकल्प माना जा रहा था क्योंकि गोल्ड पर कुछ प्रतिबंधों का असर था, लेकिन बाद में चांदी पर भी प्रतिबंधों का दबाव आने लगा। इससे चांदी के पक्ष में बना सकारात्मक माहौल कमजोर पड़ गया।
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अब चाँदी के लिए 90 डॉलर का स्तर बड़ा रेजिस्टेंस माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक चांदी इस स्तर को मजबूती से पार नहीं करती, तब तक इसमें बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। चार्ट पर बनी ट्रेंड लाइन को भी काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई बार कीमतें उसी लाइन के आसपास रुकती और पलटती दिखाई दी हैं। यही वजह है कि इसे वैध और मजबूत ट्रेंड लाइन माना जा रहा है।
अगर चाँदी इस ट्रेंड लाइन के नीचे फिसलती है तो अगला बड़ा सपोर्ट 200 डे मूविंग एवरेज के आसपास बन सकता है। वहां पहुंचने के बाद ही बाजार की अगली दिशा का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। भारतीय एमसीएक्स बाजार में भी चांदी को रुपये की कमजोरी का फायदा मिल चुका है, लेकिन अब आगे की चाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय डॉलर कीमतों पर ही निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों और ट्रेडर्स को यह समझना चाहिए कि सोना और चांदी दोनों ही बेहद उतार-चढ़ाव वाले एसेट हैं और इनमें छोटी कीमतों की चाल भी बड़े प्रतिशत बदलाव में बदल सकती है।
(शेयर मंथन, 26 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)