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एचडीएफसी बैंक में निवेश का सही समय है या नहीं? जानिए किन स्तरों पर बढ़ सकती है मुश्किलें

एचडीएफसी बैंक के शेयर में हालिया कमजोरी के बीच कई निवेशकों के मन में यह सवाल है कि क्या मौजूदा स्तरों पर लंबी अवधि के लिए खरीदारी की जाए या फिर किसी दूसरे बड़े शेयर, जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, को प्राथमिकता दी जाए।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि दोनों कंपनियां अलग-अलग सेक्टर से जुड़ी हैं, इसलिए उनकी सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा। हालांकि मौजूदा समय में दोनों शेयरों में कमजोरी जरूर देखने को मिल रही है, लेकिन निवेश का फैसला उनके अलग-अलग तकनीकी और बुनियादी पहलुओं के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार एचडीएफसी बैंक ने हाल के महीनों में ऐसा तकनीकी पैटर्न बनाया, जिससे तेजी लौटने का संकेत मिलता हुआ दिखाई दिया। शेयर ने हायर बॉटम और हायर टॉप बनाकर रिकवरी की कोशिश की, लेकिन यह तेजी टिकाऊ साबित नहीं हुई। उनका कहना है कि 860 रुपये का स्तर पहले से ही एक महत्वपूर्ण बाधा माना जा रहा था और इसके ऊपर मजबूत ब्रेकआउट के बिना शेयर में आई तेजी को केवल "डेड कैट बाउंस" ही माना जाना चाहिए था।

विश्लेषकों का मानना है कि तिमाही नतीजों का दौर किसी भी शेयर की दिशा बदल सकता है और HDFC बैंक भी इसका अपवाद नहीं है। हालांकि शेयर में प्राइस करेक्शन काफी हद तक पूरा होता दिखाई दे रहा है, लेकिन टाइम करेक्शन अभी भी जारी रह सकता है। यानी कीमतों में बड़ी गिरावट भले सीमित हो जाए, लेकिन शेयर को मजबूत तेजी पकड़ने में अभी और समय लग सकता है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार 715 रुपये का स्तर एचडीएफसी बैंक के लिए बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट है। यदि शेयर इस स्तर के नीचे लगातार बंद होने लगता है, तो यह कमजोरी का पहला बड़ा संकेत होगा। वहीं यदि शेयर 690 रुपये के नीचे फिसल जाता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा इसके बाद 10 से 15% तक अतिरिक्त गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल एचडीएफसी बैंक में घबराकर फैसला लेने की बजाय महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है। जब तक शेयर 715 रुपये के ऊपर बना रहता है, तब तक स्थिति पर निगरानी रखी जा सकती है। लेकिन यदि यह स्तर टूटता है, तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। कुल मिलाकर, संकेत बताते हैं कि शेयर में प्राइस करेक्शन काफी हद तक पूरा होने के करीब हो सकता है, लेकिन मजबूत और टिकाऊ तेजी आने से पहले समय के लिहाज से अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।


(शेयर मंथन, 29 जुलाई 2026)

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