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मजबूत माँग और रिकॉर्ड निर्यात ऑर्डरों से जून में भारत की कारोबारी गतिविधियाँ बढ़ीं, पीएमआई 14 महीने के शीर्ष पर

भारत की आर्थिक गतिविधियों ने जून महीने में जोरदार रफ्तार पकड़ी है। एचएसबीसी के जारी ताजा फ्लैश पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमएई) सर्वे के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था इस महीने अच्छी-खासी गति से आगे बढ़ी है, और इसका मुख्य कारण विनिर्माण और सेवा सेक्टर का प्रदर्शन है। एचएसबीसी फ्लैश कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स जून में बढ़कर 61 तक पहुँच गया, जो कि पिछले 14 महीनों का सबसे ऊँचा है।

स्‍टॉक स्‍प्‍लिट के बाद अब बोनस शेयर देने जा रही है ये दिग्‍गज एफएमसीजी कंपनी

एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्‍गज कंपनी नेस्‍ले इंडिया अपने शेयर धारकों को बोनस शेयर का तोहफा देने पर विचार कर रही है। खबरों के मुताबिक बोनस शेयर पर फैसला 26 जून को होने वाली कंपनी की बोर्ड बैठक में लिया जा सकता है। इससे पहले कंपनी ने 2024 में शेयर विभाजन (स्‍टॉकस्‍प्‍लिट) कर चुकी है। 

सेबी ने पीएसयू डीलिस्टिंग नियमों को आसान बनाने को दी मंजूरी, इन पर भी बदले नियम

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की बैठक में पीएसयू इकाईयों की डीलिस्‍टिंग से स्‍टार्टअप के आईपीओ समेत कई अहम मुद्दों पर फै‍सले लिये गये हैं। ये बैठक सेबी अध्‍यक्ष तुहिन कांत पांडे की अध्‍यक्षता में बुधवार (18 जून) को हुई। पांडे के मार्च में सेबी प्रमुख का पद संभालने के बाद दूसरी बैठक थी। 

पुराने शेयरों को डीमैट बनाने में मदद करेगी जीरोधा, सहूलियत के लिए शुरू की ये पहल

भारत की प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकरेज कंपनी जीरोधा ने शेयर बाजार के निवेशकों की सहूलियत के लिए एक नयी पहल की है। इसके तहत निवेशकों को उनके पुराने भौतिक शेयर प्रमाणपत्रों को डीमैट (इलेक्ट्रॉनिक) प्रारूप में बदलने की सुविधा दी जा रही है। खास बात यह है कि जीरोधा की सुविधा वैसे निवेशकों के लिए भी उपलब्ध है, जो जीरोधा के ग्राहक नहीं हैं।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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