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सत्यम की रेटिंग घटाने का सिलसिला शुरू

सत्यम कंप्यूटर की ओर प्रमोटर परिवार की कंपनियों को खरीदने का फैसला करने और इस फैसले को रद्द करने के नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब ब्रोकिंग फर्मों ने कंपनी की रेटिंग घटाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। जेपी मॉर्गन ने आईटी दिग्गजों की अपनी पसंदीदा सूची से सत्यम को निकाल दिया है और इसे अब "अंडरवेट" करार दिया है, यानी इसकी राय में निवेशकों को सत्यम में अपना निवेश घटा लेना चाहिए। सीएलएसए ने सत्यम का लक्ष्य भाव घटा कर 160 रुपये कर दिया है। आनंद राठी सिक्योरिटीज ने भी सत्यम कंप्यूटर को बेचने की सलाह देते हुए इसका लक्ष्य भाव घटा कर 150 रुपये कर दिया है।

आश्चर्य तो हमें है रामलिंग राजू साहब !

राजीव रंजन झा

सत्यम कंप्यूटर के चेयरमैन बी रामलिंग राजू को आश्चर्य है कि मेटास प्रॉपर्टीज और मेटास इन्फ्रा को खरीदने की उनकी योजना पर निवेशकों ने इतनी तीखी प्रतिक्रिया जतायी। लेकिन आश्चर्य तो हमें है, समूचे शेयर बाजार को है कि कैसे उन्होंने कॉर्पोरेट लूट का ऐसा फैसला करने का साहस जुटाया, इसके बारे में आखिर सोचा ही कैसे।

डॉव जोंस उछला, एशियाई बाजारों में बढ़त

कल फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बहुप्रतीक्षित कटौती की घोषणा कर दी। इस घोषणा के साथ ही साथ फेडरल रिजर्व ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिर से सामान्य हालात में लाने के लिए वह पूरी सहायता देने के लिए तैयार है। फलस्वरूप अमेरिकी शेयर बाजारों में मंगलवार दोपहर बाद के कारोबार में खासी उछाल देखी गयी और डॉव जोंस ने 4.2% की मजबूती दर्ज की।

सत्यम प्रमोटरों का पारिवारिक राहत पैकेज

राजीव रंजन झा

बेशक सत्यम कंप्यूटर के चेयरमैन बी रामलिंग राजू कह सकते हैं कि मेटास प्रॉपर्टीज और मेटास इन्फ्रा का अधिग्रहण कानूनी रूप से बिल्कुल सही है। शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियाँ पहले भी अपने प्रमोटरों के स्वामित्व वाली कंपनियों को खरीदती रही हैं। जब तब सवाल उठते भी रहे हैं, लेकिन लोग यह मान लेते थे कि केवल कुछ छुटभैया कंपनियाँ ही प्रमोटरों को फायदा दिलाने की नीयत से ऐसा करती हैं। यानी एक समस्या को बेहद छोटे स्तर पर मान कर कभी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन अब सत्यम की मिसाल ने साबित किया है कि कोई कानूनी छेद कभी छोटा नहीं होता और उस छेद से कोई जब चाहे एक बड़ा फायदा उठा सकता है।

रिलायंस ने डिबेंचरों से जुटाये 1,000 करोड़ रुपये

देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दो किश्तों में नॉन कनवर्टिबल डिबेंचरों (एनसीडी) के जरिये 1,000 करोड़ रुपये जुटाये हैं। इस एनसीडी इश्यू का प्रबंधन करने वाली निवेश बैंकिंग कंपनी इडेलवाइज कैपिटल ने जानकारी दी है कि 500 करोड़ रुपये के एनसीडी की दूसरी किश्त को भी सफलता के साथ पूरा कर लिया गया है।

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