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एक्सपर्ट से जानें भारती एयरटेल शेयर का टारगेट अनुमान क्या हो सकता है?

बीसी पांडे जानना चाहते हैं कि उन्हें भारती एयरटेल (Bharti Airtel) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, आईसीआईआईसीआई सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च हेड से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

एक्सपर्ट से जानें केन्स टेक्नोलॉजी में करेक्शन के बाद निवेश का मौका?

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर की प्रमुख कंपनी केन्स टेक्नोलॉजी को लेकर निवेशकों में हाल के करेक्शन के बाद फिर से दिलचस्पी बढ़ रही है। एक निवेशक ने इस शेयर में करीब 53 शेयर लगभग 5218 रुपये के भाव पर खरीदे हैं और अब मौजूदा गिरावट के बीच आगे की रणनीति को लेकर सवाल कर रहे हैं। आईसीआईआईसीआई सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च हेड पंकज पांडे का मानना है कि भले ही हाल के समय में इस स्टॉक में कीमतों में तेज गिरावट और कुछ नकारात्मक खबरों का असर देखने को मिला हो, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से इस सेक्टर की संभावनाएं अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नीतिगत कदम उठा रही है। सरकार जल्द ही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का दूसरा चरण लाने की तैयारी में है, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों को फिर से प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके अलावा सरकार की ओर से सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की भी योजना है, जिसमें इस उद्योग के विकास के लिए नया फंड और अतिरिक्त निवेश आने की संभावना है। इन पहलों से इस पूरे सेक्टर की ग्रोथ को मजबूत समर्थन मिल सकता है। हालांकि निकट अवधि में कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार समझौतों में देरी के कारण कुछ सेगमेंट्स में मांग प्रभावित हुई है। इसके चलते इस सेक्टर की कई कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला है। इसके बावजूद दीर्घकालिक दृष्टि से विशेषज्ञ मानते हैं कि EMS और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा अवसर बन रहा है। विशेष रूप से केन्स टेक्नोलॉजी सेमीकंडक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में आक्रामक पूंजी निवेश (कैपेक्स) कर रही है, जो भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि हाल का तेज करेक्शन निवेशकों के लिए अवसर बन सकता है। जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर इस शेयर में खरीदारी की है, वे मौजूदा गिरावट में धीरे-धीरे औसत लागत (एवरेजिंग) कम करने पर विचार कर सकते हैं। अल्पावधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार का बढ़ता फोकस इस सेक्टर के लिए दीर्घकाल में सकारात्मक संकेत देता है। ऐसे में धैर्य के साथ चरणबद्ध निवेश की रणनीति इस तरह के शेयरों में बेहतर साबित हो सकती है।
(शेयर मंथन, 10 मार्च 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कच्चे तेल की तेजी से बाजार में घबराहट, एक्सपर्ट से जानें सेंसेक्स-निफ्टी का विश्लेषण

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़त का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड का भाव अचानक लगभग 120 डॉलर के आसपास पहुंचने से निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 2.5% तक गिरकर लगभग 77,000 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी में भी करीब 580 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि अन्य एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही, क्योंकि कुछ एशियाई सूचकांकों में 5 से 6% तक की गिरावट देखी गई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च हेड पंकज पांडे के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर के ऊपर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इसका मतलब होगा कि वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई में व्यवधान कुछ समय तक जारी रह सकता है। ऐसे हालात पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी देखने को मिले थे, जब बाजार में करीब 10-11% तक की गिरावट आई थी और लगभग 22-23 हफ्तों तक बाजार दबाव में रहा था। फिलहाल युद्ध से पहले के स्तर से निफ्टी में लगभग 8 प्रतिशत तक का करेक्शन पहले ही आ चुका है। हालांकि पांडे का मानना है कि भारतीय बाजार में गिरावट बहुत ज्यादा गहरी नहीं होगी, क्योंकि कॉरपोरेट आय के आंकड़े अपेक्षा से बेहतर रहे हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा कोयले से पूरा होता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव अन्य कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम हो सकता है। उनका अनुमान है कि बाजार में यहां से 3 से 4% तक और गिरावट संभव है, लेकिन इसके बाद यह कमजोरी निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर बन सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा समय में बाजार में घबराकर बाहर निकलने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। क्योंकि यदि अचानक युद्ध में तनाव कम होने की खबर आती है, तो बाजार में तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। ऐसे संकेतों के लिए कच्चे तेल की कीमतें सबसे बड़ा संकेतक साबित होंगी। यदि तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो यह संकेत होगा कि वैश्विक आर्थिक जोखिम कम हो रहे हैं और बाजार में स्थिरता लौट सकती है। सेक्टर के लिहाज से देखें तो विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से संकेत मिलता है कि कैपिटल गुड्स, पावर, मेटल और बीएफएसआई जैसे घरेलू मांग से जुड़े सेक्टरों में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। वहीं आईटी सेक्टर में फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि वैश्विक मांग में सुस्ती और रिकवरी की टाइमलाइन को लेकर स्पष्टता नहीं है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए। कॉरपोरेट नतीजों की बात करें तो तीसरी तिमाही में निफ्टी कंपनियों की कमाई उम्मीद से बेहतर रही है। सात तिमाहियों के बाद करीब 9 प्रतिशत की मुनाफा वृद्धि दर्ज की गई, जो पहले के अनुमान से ज्यादा है। आगे आने वाले वर्षों में कमाई की वृद्धि दर 14-15 % तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। खासतौर पर बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का क्षेत्र इसमें अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि निफ्टी की कमाई में इसका बड़ा योगदान है। हालांकि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ने और विभिन्न उद्योगों की लागत में इजाफा होने का जोखिम भी रहेगा। इसके बावजूद कुछ सेक्टरों जैसे बैंकिंग और ऑयल-गैस को इससे फायदा भी हो सकता है। इस तरह मौजूदा अनिश्चितता के माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर साबित हो सकती है।
(शेयर मंथन, 10 मार्च 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

जियोपॉलिटिकल तनाव में गोल्ड-सिल्वर नहीं, ऑयल क्यों बन रहा असली बैरोमीटर?

वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनाव के दौर में आमतौर पर निवेशक सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में इसका असर इन धातुओं की कीमतों में उतना स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि हाल के समय में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है, जो यह संकेत देता है कि इस युद्ध या तनाव का सबसे सीधा प्रभाव ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। इसलिए इस बार जियोपॉलिटिकल स्थिति को समझने के लिए सोना-चांदी के बजाय तेल की कीमतों को ज्यादा ध्यान से देखना जरूरी माना जा रहा है। जहां तक सोने और चांदी की बात है, दोनों धातुएं फिलहाल एक सीमित दायरे (रेंज बाउंड) में कारोबार करती दिख रही हैं। अक्टूबर से अब तक सोने की कीमतों में एक संकरे ट्रेंड चैनल के भीतर ही उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बीच-बीच में कुछ तेज उछाल और गिरावट जरूर आई, लेकिन व्यापक ट्रेंड में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। सोने के मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जैसे-जैसे कीमतें नीचे आती हैं, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक खरीदारी के लिए आगे आ जाते हैं। इसका मतलब है कि सोने में एक मजबूत संरचनात्मक मांग बनी रहती है, जो कीमतों को बहुत ज्यादा नीचे जाने से रोकती है। विशेषज्ञों के अनुसार सोने में बड़ी तेजी के लिए फिलहाल कोई मजबूत ट्रिगर नजर नहीं आ रहा है। माना जा रहा है कि करीब 5400–5500 डॉलर के ऊपर ही मजबूरी वाली बड़ी खरीदारी देखने को मिल सकती है। इसके नीचे बाजार इंतजार की रणनीति अपनाए हुए है और यदि कीमतें गिरती हैं तो केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं। दूसरी ओर चांदी का रुझान सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर माना जा रहा है। फिलहाल चांदी लगभग 84 के आसपास कारोबार कर रही है और इसमें 70 से 97 के दायरे में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि 97 के ऊपर जाने के लिए भी किसी मजबूत ट्रिगर की जरूरत होगी। अगर वैश्विक व्यापार से जुड़ी समस्याएं या टैरिफ संबंधी तनाव बढ़ते हैं, तभी इसमें नई तेजी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर मौजूदा स्थिति में सोना और चांदी दोनों ही पहले की तेज बढ़त के बाद एक तरह के संतुलन या कंसोलिडेशन के दौर में हैं। आने वाले समय में इनमें या तो कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है या फिर हल्की गिरावट के साथ कीमतें संतुलित हो सकती हैं। सोने में लंबी अवधि की मांग बनी रहने की संभावना है, जबकि चांदी के लिए बाजार को नए ट्रिगर का इंतजार रहेगा।
(शेयर मंथन, 10 मार्च 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

1030 रुपये के भाव पर खरीदा टाटा कंज्यूमर के शेयर, लंबी अवधि में क्या उम्मीद?

मनंदा खेलकर जानना चाहते हैं कि उन्हें टाटा कंज्यूमर (Tata Consumer) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 1030 के भाव पर लंबी अवधि के नजरिये से खरीदा है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

टीसीएस शेयरों में गिरावट के बाद खरीदारी करें या इंतजार? विशेषज्ञों की राय

सुधीर जानना चाहते हैं कि उन्हें टीसीएस (Tata Consultancy Services) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 100 शेयर हैं जिनकी औसत खरीद कीमत लगभग 2600 रुपये के आसपास है और उनका नजरिया लंबी अवधि का है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

रेडिएंट कैश शेयर में निवेश से पहले बिजनेस मॉडल समझना क्यों जरूरी है?

संदीप अरणपल्ले जानना चाहते हैं कि उन्हें रेडिएंट कैश (Radiant Cash) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

रिलैक्सो फुटवियर में कब आएगी रिकवरी? एक्सपर्ट ने बतायी आगे क्या करना चाहिए?

एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें रिलैक्सो फुटवियर (Relaxo Footwears) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

10 मार्च को खुलेगा इनोविजन का आईपीओ, 322 करोड़ जुटाने की तैयारी, मैनेजमेंट से एक्सक्लूसिव बात

इनोविजन अपना नया आईपीओ लेकर बाजार में उतरने जा रही है, जिसकी शुरुआत 10 मार्च से होगी और 12 मार्च तक निवेशक इसमें बोली लगा सकेंगे।

एचडीएफसी बैंक शेयर अभी कितना और गिरेगा? एक्सपर्ट ने बतायी अहम सपोर्ट रेंज

विनोद शर्मा जानना चाहते हैं कि उन्हें एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

रूट मोबाइल शेयरों में भारी गिरावट, क्या निवेशकों को रहना चाहिए सावधान?

विकास जानना चाहते हैं कि उन्हें रूट मोबाइल (Route Mobile) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 850 रुपये के भाव पर लिया है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

एसबीआई और इंडियन बैंक पर निवेशकों की चिंता, क्या और गिरेगा बैंकिंग शेयर?

एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें एसबीआई और इंडियन बैंक (SBI Indian Bank) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

टीवीएस सप्लाई चेन में निवेशकों की दुविधा, एक्सपर्ट से जानें शेयरों को रखें या निकल जाएं?

रवि चौधरी जानना चाहते हैं कि उन्हें टीवीएस सप्लाई चेन (TVS Supply Chain) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उनके पास 500 शेयर हैं, जिनका औसत भाव करीब 154 रुपये है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

मिडिल ईस्ट तनाव से हिले बाजार, निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद कि यह संघर्ष चार से छह हफ्ते तक चल सकता है।

एफडी से बेहतर टैक्स फायदा? एक्सपर्ट से समझिए आर्बिट्रेज फंड्स का खेल

शेयर बाजार में निवेश करते समय अधिकांश निवेशक ऐसा विकल्प तलाशते हैं जिसमें जोखिम अपेक्षाकृत कम हो और रिटर्न भी स्थिर मिल सके। इसी संदर्भ में म्यूचुअल फंड की एक खास श्रेणी आर्बिट्रेज फंड्स है, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाला माना जाता है।

आईटी सेक्टर में अनिश्चितता के बीच हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज पर क्या रखें रणनीति?

विजय सिंह जानना चाहते हैं कि उन्हें हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज (Hexaware Technologies) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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