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सर्राफा

सर्राफा में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ कारोबार करने की संभावना है। सोने (अगस्त) की कीमतों को 49,100 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 48,700 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (जुलाई) की कीमतों में 71,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 71,100 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ कारोबार करने की संभावना है। सोने (अगस्त) की कीमतों को 49,100 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 48,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (जुलाई) की कीमतों में 71,300 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 70,100 रुपये पर सहारा रह सकता है।

डॉलर के कमजोरी से सर्राफा की कीमतों में बढ़त की उम्मीद - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

अमेरिकी बेरोजगारी लाभ के दावों में आश्चर्यजनक उछाल के साथ ही डॉलर के कमजोर होने और ट्रेजरी यील्ड कम होने से सर्राफा की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

सर्राफा में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है और कीमतों में गिरावट के बाद खरीदारी की जा सकती है। सोने की कीमतों को 47,400 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 46,400 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में 68,200 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 67,100 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा की कीमतों में बिकवाली का दबाव रहने की संभावना - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों पर बिकवाली का दबाव रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 46,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 45,900 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में 67,200 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 66,200 रुपये पर सहारा रह सकता है।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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