अमेरिकी बाजार में गिरावट से गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोर शुरुआत हुई है।
अमेरिकी बाजार में गिरावट से बुधवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोर शुरुआत हुई है।
अमेरिका की ओर से 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त चीनी सामानों पर शुल्क लगाये जाने की संभावना से एशियाई बाजारों में कमजोरी आयी है।
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को शुरुआती सत्र में एशियाई बाजारों में कमजोरी है।
फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले मंगलवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है।
कारोबारी सप्ताह के आखरी दिन शुक्रवार को एशियाई बाजारों में गिरावट के साथ शुरुआत हुई है।
अमेरिकी शेयर बाजार से मिले कमजोर संकेतों के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार में कमजोरी है।
अमेरिकी बाजार में गिरावट से आज बुधवार को एशियाई बाजारों में कमजोर शुरुआत हुई है।
अमेरिका-चीन के बीच बरकरार व्यापार तनाव के कारण एशियाई बाजार गुरुवार को दबाव में दिख रहे हैं।
गुरुवार को एशियाई बाजारों में खरीदारी देखने को मिल रही है। हालाँकि हॉन्ग-कॉन्ग और ताइवान के बाजार सूचकांक दबाव में हैं।
कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को एशियाई बाजारों में जोरदार खरीदारी देखने को मिल रही है।
मंगलवार को एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिल रही है।
तकनीकी शेयरों में बिकवाली से अमेरिकी बाजार में आयी गिरावट का असर बुधवार को एशियाई बाजारों पर भी दिख रहा है।
बुधवार को एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है।
कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को एशियाई बाजारों में बिकवाली बरकरार है।
एशियाई बाजारों में बिकवाली का सिलसिला बना हुआ है, जिससे मंगलवार को भी प्रमुख सूचकांक दबाव में हैं।
अमेरिकी बाजार में बढ़ोतरी के बाद बुधवार को एशियाई बाजारों में बिकवाली बरकरार है।
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार तनाव के बीच गुरुवार को एशियाई बाजार दबाव में है।
बुधवार को एशियाई बाजारों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है।
डॉलर के मुकाबले यूरो के 22 महीनों के निचले स्तर तक गिरने के बाद गुरुवार को एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने देखने को मिल रही है।
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हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।