एमसीएक्स कच्चे तेल की कीमतें 6,000 रुपये के साप्ताहिक और मासिक बाधा स्तर से ऊपर कारोबार कर रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा सकती है। कीमतों को 5,150 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 5,080 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों के एक दायरे में रहने की संभावना है। कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतें 3,740-3,860 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों के एक दायरे में रहने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों के नरमी के साथ खुलने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 2,970 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 2,730 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 3,040 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,830 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किये जाने की संभावना हैं और कीमतों को 2,980 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,780 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 3,020 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,860 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना हैं और कीमतों को 3,060 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 2,890 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।