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एक्सपर्ट से जानें निवेशकों को ट्रेंट शेयरों को एवरेज करना चाहिए या नहीं?

जूना जानना चाहते हैं कि उन्हें ट्रेंट (Trent) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने ट्रेंट के 543 शेयर करीब 5500 रुपये के भाव पर खरीदे थे। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि अब जब स्टॉक 3700-3800 के आसपास आ चुका है, तो स्वाभाविक तौर पर एवरेजिंग का ख्याल आ रहा है। ट्रेंट पर चर्चा पहले भी कई बार हो चुकी है और इसमें तेज़ उतार-चढ़ाव निवेशकों को असहज करता रहा है। ऐसे में फैसला भावनाओं के बजाय बिजनेस और वैल्यूएशन के आधार पर लेना जरूरी है। सबसे पहले यह साफ कर लें कि ट्रेंट एक क्वालिटी बिज़नेस है। कंपनी की ग्रोथ में कोई बुनियादी समस्या नहीं दिखती। जूडियो जैसे फॉर्मैट ने इसे मल्टीबैगर बनाया और मैनेजमेंट ने बिजनेस को नए सिरे से री-इमेजिन किया है। समस्या बिज़नेस की नहीं, बल्कि एक्सेसिव एक्सपेक्टेशन और ऊंचे वैल्यूएशन की है। जब स्टॉक 80x P/E जैसे लेवल पर ट्रेड करता है, तो वहां जरा सी भी निराशा भारी करेक्शन ला सकती है। 50x और 80x के बीच का फर्क बहुत बड़ा होता है। 

अब ट्रेंट उस फेज में है जहां बिज़नेस “नॉर्मल ग्रोथ मोड” में आ रहा है। अगर कंपनी 20–25% की हेल्दी ग्रोथ भी करती है, तो वह अपने आप में खराब नहीं है, लेकिन उस ग्रोथ के लिए 80x जैसा वैल्यूएशन जस्टिफाई करना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से बाजार ने ट्रेंट को भी पीटा है, खासकर जब समग्र माहौल भी कमजोर हो।

एवरेजिंग के सवाल पर सीधा जवाब यह है कि एक बार में एवरेजिंग नहीं करनी चाहिए। ट्रेंट जैसे स्टॉक को SIP या स्टैगर्ड बाइंग के नजरिए से देखना ज़्यादा समझदारी है। मान लीजिए आपने 5500 पर खरीदा था। अगर आप 3700 के आसपास थोड़ा खरीदते हैं और फिर 3400-3500 के ज़ोन में और ऐड करते हैं, तो आपकी एवरेज कॉस्ट काफी नीचे आ सकती है। उदाहरण के तौर पर 5500, 3700 और 3400 पर खरीदने से एवरेज करीब 4200 के आसपास आ जाती है। लॉन्ग टर्म में ट्रेंट का 4200-4500 का बिजनेस वैल्यू बनाना असंभव नहीं है।

लेकिन यहां एक अहम बात समझनी ज़रूरी है। एवरेजिंग का मतलब यह नहीं कि गिरते भाव पर अंधाधुंध खरीदते रहें। एवरेजिंग की भी एक सीमा होती है। 3500 के नीचे अगर स्टॉक लंबे समय तक टिकता है और वहां से भी और फिसलता है, तो यह संकेत हो सकता है कि सिर्फ वैल्यूएशन नहीं, बल्कि कुछ और गड़बड़ है। उस स्थिति में दोबारा सोचने की ज़रूरत पड़ेगी।

ट्रेंट का बिजनेस ऐसा है जो भारत में दशकों तक चल सकता है। रिटेल और कंजम्पशन ऐसा सेक्टर है जहां सही तरीके से काम करने वाली कंपनियां 2050–2070 तक भी वैल्यू क्रिएट कर सकती हैं। इसलिए ऐसे फ्रंटलाइन बिजनेस में गिरावट के बाद सीमित और सोच-समझकर एवरेजिंग लॉजिकली गलत नहीं है। लेकिन यह तभी तक सही है, जब तक बिजनेस ट्रैक पर है और गिरावट कंट्रोल्ड जोन में है।


(शेयर मंथन, 01 जनवरी 2026)

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