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साल 2008 में एशियाई बाजारों का रहा बुरा हाल

अमेरिकी शेयर बाजारों से एशियाई शेयर बाजारों के अलगाव की बहस बेशक जारी है, लेकिन साल 2008 में एशियाई बाजार भी अच्छी-खासी गिरावट के शिकार बने। चीन के शंघाई कंपोजिट का हाल सबसे बुरा रहा और इस दौरान इसमें 65.4% की भारी गिरावट आयी। जापान के निक्केई सूचकांक में इस साल के दौरान 42% से अधिक की गिरावट आयी, जबकि ताइवान के ताइवान वेटेड में 46% की कमजोरी रही।

हम काफी लंबी मंदी के दौर में

शंकर शर्मा, वाइस चेयरमैन, फर्स्ट ग्लोबल

इस साल के मध्य तक बाजार में मंदी का रुख रहेगा और उसके बाद यह कुछ वापस संभलेगा। कुल मिला कर अगले कई सालों तक भारतीय बाजार अपने पिछले शिखर को नहीं छू सकेगा। हम काफी लंबी मंदी के दौर में जा चुके हैं।

साल 2009 का स्वागत बढ़त के साथ

भारतीय शेयर बाजारों ने कैलैंडर साल 2009 का स्वागत बढ़त के साथ किया। साल  के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 256 अंक या 2.66%  की मजबूती के साथ 9,903 पर रहा। एनएसई के निफ्टी ने 3,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। निफ्टी 74 अंक या 2.5% की बढ़त के साथ 3,033 पर बंद हुआ। बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए। इसके मद्देनजर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। 20 दिसंबर को खत्म सप्ताह में महंगाई दर गिरकर 6.38% रह गयी है। इस खबर ने बाजार को और मजबूती प्रदान की। इसके फलस्वरूप भारतीय शेयर बाजारों ने आज अच्छी बढ़त दर्ज की।

दिसंबर में मारुति की बिक्री 10% घटी

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की बिक्री में दिसंबर महीने में 10% की गिरावट आयी है। दिसंबर 2007 में 62,515 कारों की बिक्री करने वाली कंपनी दिसंबर 2008 में 56,293 कार ही बेच पायी है। मारुति सुजुकी की ए-1 सेगमेंट कारों की बिक्री में करीब 60% की गिरावट आयी है, लेकिन इसके लिए उत्साहजनक बात यह है कि ए-3 सेगमेंट कारों की बिक्री में 98% की बढ़त दर्ज की गयी है।

भारतीय बाजारों में मजबूती

1.50: नये साल के पहले दिन भारतीय शेयर बाजारों ने कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ की। इस समय सेंसेक्स 109 अंक चढ़ कर 9,756 पर है, जबकि निफ्टी 30 अंक ऊपर 2,989 पर है। सीएनएक्स मिडकैप सूचकांक में 1.3% की बढ़त है। बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में 2.5% से अधिक मजबूती है। बीएसई के सभी क्षेत्रवार सूचकांक हरे निशान में हैं। बीएसई धातु सूचकांक में 3.9% और रियल्टी सूचकांक में 2.9% की बढ़त है। रिलायंस कम्युनिकेशंस में 5.5%, सत्यम कंप्यूटर्स में करीब 5%, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज में 4.3%, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में 3.8% और टाटा स्टील में 3.2% की मजबूती है।

2008 के सबक याद रखना जरूरी

अजय बग्गा, चेयरमैन, एफपीएसबीआई

साल 2009 आने के समय हालात ऐसे हैं कि कोई भी साल 2008 को याद नहीं रखना चाहता। यह स्थिति पिछले दिसंबर से ठीक विपरीत है, जब निवेशक बड़ी आशा और आत्मविश्वास के साथ साल 2008 का स्वागत कर रहे थे। इसके पीछे यह सोच थी कि भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था, अमेरिकी अर्थव्यवस्था से एक हद तक अलग (डिकपल्ड) हो गये हैं। लेकिन अमेरिकी बाजारों में सबप्राइम ऋणों के कारण उत्पन्न कर्ज के संकट से शुरु होने वाली इस समस्या ने गंभीर रूप ले लिया। इसने बेयर स्टर्न्स, लेहमन ब्रदर्स, वाशिंगटन म्युचुअल और मेरिल लिंच जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं को ध्वस्त कर दिया। ऐसा क्यों हो गया?

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