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आईआरएफसी का फोकस अब सस्ते फंड और सुरक्षित लोन मॉडल पर

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) आने वाले वर्षों में अपने फंडिंग मॉडल को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।

कंपनी ने साफ किया है कि उसका सबसे बड़ा लक्ष्य ‘जीरो NPA’ की स्थिति बनाए रखना है, ताकि उसे घरेलू और विदेशी बाजारों से कम ब्याज दर पर फंड मिलता रहे। आईआरएफसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे का कहना है कि आईआरएफसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए 70 हजार करोड़ रुपये की बॉरोइंग का लक्ष्य तय किया है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और घरेलू बॉन्ड मार्केट जैसे कई माध्यमों से पैसा जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य हमेशा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) की तुलना में कम लागत पर फंड जुटाना है।

मनोज कुमार दुबे ने बताया कि IRFC का लगभग 20 से 25 फीसदी बॉरोइंग हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है। फिलहाल कंपनी जापानी येन आधारित लोन पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जबकि डॉलर बॉन्ड्स को लेकर परिस्थितियों के अनुसार फैसला लिया जाएगा। कंपनी का दावा है कि मजबूत हैजिंग सिस्टम और कॉस्ट-प्लस मॉडल के जरिए जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा रहा है।

आईआरएफसी लंबी अवधि के लिए 20 से 30 साल तक के लोन देती है और उसी हिसाब से अपनी बॉरोइंग स्ट्रैटेजी तैयार करती है। कंपनी पहले भी अमेरिकी बाजार में 30 साल का बॉन्ड जारी कर चुकी है, जिसे भारी सब्सक्रिप्शन मिला था। कंपनी का मानना है कि भारत में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और मेट्रो प्रोजेक्ट्स के विस्तार के साथ उसके लिए आने वाले 5 से 10 साल बेहद मजबूत ग्रोथ वाले रहेंगे।

(शेयर मंथन, 28 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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