भारतीय शेयर बाजार में हालिया तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी नीति को लेकर सकारात्मक उम्मीदों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम के अनुसार, तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आई है क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक निवेशकों के बीच यह आशंका थी कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण आरबीआई को सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है। लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम हो गई है। इससे बैंकिंग और अन्य ब्याज दरों पर निर्भर क्षेत्रों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
सुनील ने कहा कि बाजार की अगली दिशा तय करने में दो महत्वपूर्ण कारक भूमिका निभाएंगे। पहला, आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति और दूसरा, मानसून की स्थिति। यदि मानसून सामान्य रहता है तो ग्रामीण मांग मजबूत होगी और इसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था तथा शेयर बाजार दोनों पर दिखाई देगा।
उन्होंने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के रुख को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ने के बावजूद विदेशी निवेशक अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि एफआईआई खरीदारी की ओर लौटते हैं तो बाजार में तेजी का सिलसिला और मजबूत हो सकता है।
सुनील सुब्रमण्यम का मानना है कि शेयर बाजार अंततः निवेशकों के भरोसे पर चलता है। तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक तनाव में कमी, आरबीआई से सकारात्मक उम्मीदें और विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी भारतीय बाजार के लिए उत्साहजनक संकेत हैं। आने वाले कुछ सप्ताह निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
(शेयर मंथन, 01 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)