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कच्चे तेल की कीमतों का असर अर्थव्यवस्था पर दबाव क्यों बढ़ा रहा है?

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि इस साल ब्रेंट क्रूड औसतन 85 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है। इसके अलावा भारत को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त परिवहन और बीमा लागत भी चुकानी पड़ रही है। इससे वास्तविक आयात लागत और बढ़ जाती है। हालांकि यह स्थिति आर्थिक विकास दर पर दबाव डाल सकती है, लेकिन अनुमान है कि भारत 6.5 प्रतिशत के आसपास की जीडीपी वृद्धि बनाए रखने में सफल हो सकता है। सरकार भी ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों पर काम कर रही है ताकि भविष्य में किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं तो भारतीय अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना कर सकती है।

(शेयर मंथन, 03 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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